चोदने से टेंशन दूर हुई

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मेरा नाम आयुष है मैं अंबाला का रहने वाला हूं। मेरी उम्र 30 वर्ष है मैंने अंबाला से अपनी पढ़ाई पूरी की लेकिन उसके बाद मेरी नौकरी चंडीगढ़ में लग गई। मुझे चंडीगढ़ में नौकरी करते हुए साल भर हो चुका है।

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मैं पहले अपने एक दोस्त के साथ ही रहता था लेकिन जब उसका ट्रांसफर दिल्ली हो गया तो मुझे लगा कि मुझे किसी को अपने साथ रख लेना चाहिए लेकिन मुझे ऐसा कोई लड़का मिला ही नही।

मैं सोचने लगा कि मेरा रेंट काफी ज्यादा है इसलिए मुझे कहीं रूम चेंज कर लेना चाहिए लेकिन मेरे पास समय का अभाव था इसलिए मैं कहीं रूम भी नहीं देख पा रहा था।

एक दिन मैं अपनी छुट्टी के दिन अपने लिए शॉपिंग करने के लिए गया हुआ था मैंने सोचा काफी वक्त से मैंने अपने लिए कुछ शॉपिंग भी नहीं की है तो कुछ सामान खरीद लिया जाए

इसी सिलसिले में मैं अपने लिए सामान खरीदने गया तो वहां पर मेरी मुलाकात रंजीता जी से हो गई मैंने उन्हीं की दुकान से सामान खरीदा। मैंने उनकी दुकान से अपने लिए शर्ट और पेंट खरीदी।

मैं जब कपड़े ले रहा था तो बातों बातों में मैंने उन्हें बता दिया कि मैं अपने लिए कोई घर देख रहा हूं क्योंकि जिस जगह पर मेरा रूम है वहां पर मैं अकेले इतना किराया नहीं भर सकता। वह मुझे कहने लगी कि यदि तुम मेरे घर पर रहना चाहते हो तो तुम आज मेरे साथ चल सकते हो। मैं भी उनके साथ उनके घर पर चला गया।

मैंने जब उनके घर में रूम देखा तो मुझे काफी अच्छा लगा मैंने सोचा कि मुझे उन्हीं के घर में रूम ले लेना चाहिए और उसका किराया भी काफी कम था।

मैंने उन्हें कहा मैडम ठीक है मैं आपके घर में अगले महीने से रहने आ जाऊंगा आप थोड़े पैसे अभी ले लीजिए। वह कहने लगी ठीक है तुम अगले महीने से यहां रहने आ जाना।

मैंने उन्हें थोड़े पैसे पकड़ा दिये क्योंकि जिस जगह मैं रह रहा था वहां पर मैं पहले ही किराया दे चुका था इसीलिए मुझे मजबूरी में वहां रहना पड़ा।

करीब 15 से 20 दिन बाद मुझे रंजीता जी का फोन आया और वह कहने लगी तुम अगले महीने कितने तारीख तक आ जाओगे? मैंने उन्हें कहा मैडम बस मेरी छुट्टी के दिन ही मैं आपके घर पर अपना सामान रखवा देता हूं।

वह कहने लगी ठीक है। यह कहते हुए उन्होंने फोन रख दिया। मैंने उसके कुछ दिन बाद रंजीता जी के घर पर अपना सामान रखवा दिया। अब मैं उनके घर पर ही रहने लगा था।

शुरुआत में तो मुझे थोड़ा दिक्कत हुई क्योंकि मैं जिस जगह रहता था वहां पर काफी बड़े रूम थे लेकिन रंजीता जी के घर पर जो रूम था वह थोड़ा छोटा था मुझे एडजेस्ट करने में थोड़ा समय लगा लेकिन धीरे-धीरे मुझे अब आदत होने लगी थी। रंजीत जी का नेचर इतना अच्छा है कि मुझे जब भी ऑफिस से आने में देर हो जाती तो वह कई बार मेरे लिए खाना बना कर रख देती थी। उनके पति का नेचर भी बहुत अच्छा है उनका एक लड़का है जो कि 9वीं में पड़ता है।

एक दिन छुट्टी के दिन मैं अपने घर पर ही बैठा हुआ था उस दिन मेरे पास रंजीता जी आई और कहने लगे कि क्या तुम मोंटी को ट्यूशन पढ़ा दोगे? मैंने उनसे कहा कि मुझे तो पढ़ाई छोड़े हुए काफी वक्त हो चुका है

लेकिन फिर भी मैं कोशिश करूंगा। मैंने उनसे कहा कि मोंटी पहले जहां ट्यूशन पढ़ता था वहां पर क्या दिक्कत हो गई? वह मुझे कहने लगे की जिस जगह वह ट्यूशन पड़ता है वहां पर काफी बच्चे आते हैं इसलिए जो वहां के टीचर है वह पूरी तरीके से बच्चो पर ध्यान नहीं दे पाते और शायद इसी वजह से मोंटी के नंबर भी कम आने लगे हैं।

उनका घर हमारे घर से भी काफी दूर है इसलिए मैं सोच रही हूं कि यदि मोंटी कहीं नजदीक में ट्यूशन पढ़ लेता तो मेरा भी समय बच जाता क्योंकि मोंटी को छोड़ने के लिए मुझे ही जाना पड़ता है।

मैंने उन्हें कहा ठीक है मैं कोशिश करता हूं जब तक मोंटी कोई अच्छा ट्यूशन टीचर नहीं मिल जाता तब तक आप उसे मेरे पास भेज दीजिए।

वह कहने लगे ठीक है मैं तब तक मोंटी को आपके पास भेज देती हूं। मोंटी मेरे पास ट्यूशन पढ़ने आने लगा था मुझसे जितना हो सकता था मै उसे ट्यूशन पढ़ा रहा था क्योंकि मुझे भी स्कूल छोड़े हुए काफी वक्त हो चुका था। मोंटी मेरे पास कभी सुबह के वक्त ट्यूशन आता तो कभी शाम के वक्त आता।

एक दिन मैं अपने ऑफिस से लौटा ही था तो रंजीता जी और उनके पति के बीच में बहुत झगडा हो रहा था मैं जैसे ही गेट से अंदर घुसा तो मैंने देखा कि उन दोनों के बीच काफी गरमा गरमी हो रही थी इसलिए मैं भी दबे पाओं अपने रूम में चला गया लेकिन शायद उन्हें पता चल चुका था कि मैं आ चुका हूं।

उसके बाद वह थोड़ा धीमी आवाज में बात करने लगे परंतु दोनों के बीच में झगड़ा तो काफी बढ़ चुका था। मैंने भी अपने रूम में जाकर अपने लैपटॉप को ऑन किया और मैं गाने सुनने लगा। उनकी आवाज मेरे कानों तक नहीं आ रही थी और मैं बड़े ही मजे से गानो का आनन्द ले रहा था। मैं पुराने गाने सुनने का बड़ा शौकीन हूं

इसलिए मैंने भी पुराने गाने लगा दिये और उन गानों में खो गया था। जब मुझे रंजीता जी ने आवाज लगाई तो मैंने अपने कान से हेडफोन निकाले मैंने देखा वह दरवाजे के पास ही खड़ी है।

वह मुझसे कहने लगी तुम ऑफिस से आ गए? मैंने कहा हां मैं ऑफिस आ गया। उन्होंने मुझसे यह सब पूछा वह बड़ी उदास दिखाई दे रही थी। वह मेरे बिस्तर में बैठ गई।

मैंने उन्हें कहा आप दोनों के बीच आज बहुत झगड़े हो रहे थे। उन्होने अपने पति के सारे कारनामे मुझे बता दिया और कहने लगी मैं उन पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं करती। मैंने भी उनकी मोटी जांघों पर हाथ रखे।

वह कहने लगी अब तो जैसे मेरा जीवन बर्बाद ही हो चुका है वह मुझसे गले लगकर रोने लगी। उन्हे देखकर मेरा लंड खड़ा होने लगा उनके स्तन मुझसे टकरा रहे थे मेरे अंदर की गर्मी बाहर निकाला जाती। मैंने कुछ देर बाद उन्हें नीचे लेटा दिया और मैंने उनके स्तनों को दबाना शुरू किया तो उन्हें भी मजा आने लगा।

वह कहने लगी तुम ऐसे ही मेरे स्तनों को दबाते रहो। उनकी सारी टेंशन दूर हो गई थी और उनका ध्यान सिर्फ मेरे ऊपर था। जैसे ही उन्होंने मेरे लंड को बाहर निकाला तो वह अपने हाथ से लंड को हिलाने लगी। मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर ले लिया जैसे ही उन्होंने अपने मुंह में लंड लिया तो मुझे बहुत अच्छा महसूस होने लगा।

मैंने उन्हें कहा आप ऐसे ही मेरे लंड को चूसो। जब मैंने उनकी चूत के अंदर अपने लंड को डाला तो उन्हें बहुत अच्छा महसूस होने लगा। वह अपने दोनों पैरों को खोलने लगी। मैंने भी उतनी तेज गति से धक्के देने शुरू कर दिए जितनी तेज गति से उनकी चूत का पानी बाहर की तरफ को निकल रहा था। उनका बदन बड़ा ही टाइट था।

मैंने उनके होठों को चूसना शुरू किया तो मुझे बहुत अच्छा लगने लगा। कुछ देर तक मैं उन्हें ऐसे ही चोदता रहा। जब मैंने उन्हें अपने ऊपर आने को कहा तो उन्होंने अपनी चूत में मेरे लंड को लेते हुए अपनी चूतडो को ऊपर नीचे करना शुरू कर दिया मुझे बहुत अच्छा महसूस होता जब वह अपन चूतडो को ऊपर नीचे करती।

वह काफी देर तक ऐसे ही करती रही मैं भी लगातार उन्हें तेज गति से चोदे जा रहा था। मुझे बहुत अच्छा लग रहा था काफी देर तक तो मैं ऐसे ही उन्हें धक्का मारता रहा परंतु जैसे ही मेरा वीर्य पतन होने वाला था तो मैंने उन्हें अपने नीचे लेटा दिया और कहा मेरा वीर्य गिरने वाला है। वह कहने लगी तुम और भी तेज गति से मुझे धक्के मारो।

मैंने उन्हें बड़ी तेज गति से धक्के मारे उनकी योनि पूरी चिकनी हो चुकी थी मेरा वीर्य भी मेरे लंड के ऊपर तक पहुंच गया था। मैंने उन्हें बड़ी तेज गति से धक्के मारने शुरू कर दिए थे।

मैंने उन्हें इतनी तेज धक्के मारे उनके पूरे बदन में करंट दौड़ पड़ता। मेरा भी वीर्य पतन होने वाला था तो मैंने अपने लंड को बाहर निकालते हुए उनके मुंह पर अपने वीर्य का छिड़काव कर दिया।

जैसे ही मेरा वीर्य उनके मुंह पर गिरा तो उन्होंने अपने मुंह को कपड़े से साफ किया। वह कहने लगी आज तो तुमने मेरी सारी टेंशन दूर कर दी। ऐसे ही तुम हमेशा मेरी टेंशन को दूर कर दिया करो।

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