कॉलेज में फसाई और रात को वहीँ चोद दी

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कहानी पढ़ने वाले सभी दोस्तों को मेरा ठोक के सलाम | मैं हूँ रंजन पासी और मैं आगरा का रहने वाला हूँ |

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मेरे दोस्त अक्सर कहते हैं कि मैं लड़कियां पटाने में एक्सपर्ट हूँ और बात शायद सच भी है क्योंकि जो भी लड़की मुझे पसंद आये है मैंने उसको किसी न किसी तरीके से पता ही लिया है |

जो कहानी मैं आपको बताने जा रहा हूँ वो उनमें से ही एक लड़कीबाज़ी की है जो मैं करता रहता हूँ | चलिए अब बिना किसी नौटंकी के मैं आपको अपनी कहानी बताता हूँ |

मैं एक सिविल इंजीनियर हूँ और मैं एक कॉलेज में पढ़ता भी था | उस कॉलेज में एक मैडम थी जिसका नाम था एकता वो बहुत सुन्दर लगती थी और जिस दिन मैंने उसको पहली बार देखा था मैंने सोच लिया था इसको ज़रूर पटाऊंगा |

मैं उससे जब भी बात करने की कोशिश करता था तो वो ज्यादातर काम का बहाना करके चली जाती थी और सिर्फ उसे देखता रह जाता था | मुझे लग लग रहा था कि वो  म्मुझे पसंद नहीं करती इसलिए  म्मुझे से बात  नहीं कर रही है |

एक दिन उसको बुलाया और कहा सुनिए तो उसने कहा अभी काम है थोड़ी देर बाद बात करते हैं और जाने लगी | तो मैंने उसका हाँथ पकड़ और कहा तुम्हारे पास तो हमेशा काम होता है

बात नहीं करनी तो सीधे बोल दो ना ? और फिर मैं वहां से चला गया | उसने कुछ नहीं कहा और मैं अब उसकी तरफ देखता भी नहीं और दूसरी मैडमों  के पास बैठ कर उनसे खूब बातें किया करता था |

फिर के दिन मैं जा रहा था तो उसने मुझे बुलाया और मैंने कहा मुझे काम है और जाने लगा |

तो उसने कहा तुम्हें तो हमेशा काम होता है बात नहीं करनी तो सीधे बोल दो ना ? मैंने उसकी तरफ देखा और वो हसने लगी और मुझे भी हंसी आ गई |

अब हम रोज़ साथ बैठ कर खूब बातें किया करते थे और फिर हमने एक दुसरे का नंबर भी ले लिया और रात भर फ़ोन पर बातें करते रहते थे | एक मैंने उसको प्रोपोस कर दिया और उसने भी हाँ कर दी |

अब हमरा प्यार का सिलसिला चालू हुआ और हम साथ में घुमने लगे और एक दुसरे को किस तो करते ही रहते थे | लेकिन मैं तो कमीना ही था मैंने उसको पटाया सिर्फ उसकी चूत मारने के लिए था | मैं सोच ही रहा था कि इसको कहाँ लेकर जाऊं जहाँ पर इसकी मार सकूँ | लेकिन मुझे कोई जगह मिल नहीं रही थी |

तभी मेरे कॉलेज में प्लेसमेंट के लिए कंपनी आना शुरू हो गई और हमें उसकी देख रेख करने के लिए कॉलेज में रुकना पडता था और कभी तो बहुत देर भी हो जाती थी | मैं ज्यादातर उसको अपनी गाड़ी पर बैठा कर उसके घर छोड़ का आया करता था | एकता थी तो चालू लेकिन मुझे चूत तक पहुँचने का मौका ही नहीं देती थी |

हम जब भी किस किया करते थे तो मैं सिर्फ उसके दूध ही दबाता रहता था और जैसे ही मैं उसकी चूत पर हाँथ रखता था तो वो मेरा हाँथ हटा देती थी और कहती थी अभी नहीं | मैं हर बार उसकी चूत मारने से वंचित रह जाता था लेकिन मुझे तो उसको चोदना ही था |

एक दिन टी.वी. पर एक पिक्चर आ रही थी तो उसमें हीरो ने बात बोली कि लड़की की ना में भी हाँ होती है | तो मैंने इस बात को अपना गुरु मंत्र बना लिया और अगले कॉलेज पहुंचा और मैंने पूरा मन बना लिया था आज तो इसकी चूत मारके ही रहूँगा | किस्मत से उस दिन कॉलेज में एक कंपनी आने वाली थी और उसमें हमारी ड्यूटी लगी थी |

मुझे लगा आज मौका भी है और दस्तूर भी मार दो चौका | फिर हम दोनों दिन भर प्लेसमेंट की भाग दौड़ में लगे रहे और प्लेसमेंट भी लम्बा चला और रिजल्ट्स आने में 8 बज गए | अब मुझे और एकता को बैठ कर कंप्यूटर में सबकी एंट्री करनी थी और हम लैब में बैठे थे |

तो मैं बाहर आया और कॉलेज में घुमने लगा और देखने लगा कि कौन कौन रुका है अभी कॉलेज में ? मैं नीचे गया तो कुछ बच्चे खड़े थे तो मैंने उनको घर जाने को कहा और वो लोग भी गाड़ी लेकर निकल गए |

फिर मैं ऊपर आया और देखने लगा कि ऑफिस में कौन कौन है ? तो ऑफिस में कोई नहीं था और फिर मैंने सफाई करने वालों को देखा तो वो लोग भी घर ही जा रहे थे और ज्यादा कोई कॉलेज में था नहीं इसलिए मैंने मौके का फायदा उठाने की सोची और जल्दी से भाग के लैब में पहुँच गया | एकता वहां बैठ कर काम कर रही थी |

मैं उसके पास गया और पीछे से कंधों पर अपना हाँथ रखा और कहा कितना काम करोगी कल कर लेना ? तो उसने कहा कल तो जमा करना है अभी ही करना पड़ेगा | तो मैंने कहा घर पर कर लेना तो उसने कहा ठीक है चलो चलते हैं

तो मैंने कहा इतनी जल्दी क्या है ? तो उसने क्या करेंगे यहाँ पर ? तो मैंने उसका हाँथ पकड़ा और कहा तुम्हें पता है मैं तुमसे कितना प्यार करता हूँ | तो उसने कहा हाँ बहुत लेकिन अभी चलो | तो मैंने उसको अपनी तरफ घुमाया और अपने होंठों से उसको होंठों को चूमने लगा और अब हमारी किस शुरू हो गई |

अब हम दोनों एक दुसरे को किस करने लगे और होंठों को चूसने लगे | मैंने उसके दूध पर अपना हाँथ रखा और दबाने लगा | फिर मैंने अपना हाँथ उसकी चूत पर रखा और वो एकदम से रुक गई और उसने कहा अभी नहीं |

तो मैंने फिर से उसको पकड़ा और उसका हाँथ पकड़ कर उसको किस करने लगा | फिर मैंने उसका एक हाँथ अपने लंड पर रखा और रगड़ने लगा | फिर मैंने उसका हाँथ छोड़ दिया और वो मेरे लंड को रगडती रही | फिर मैंने उसका हाँथ अपनी पेंट में घुसा दिया और फिर मैं उसकी चूत पे हाँथ लगा के मलने लगा |

अब वो मुझे बिलकुल भी नहीं रोक रही थी और मैं उसकी चूत बड़े प्यार से मले जा रहा था | तभी किसी के आने की आवाज़ सुनाई दी और हम दोनों रुक गए और मैं बाहर देखने चला गया | बाहर पियून था और वो रहा था |

तो मैं अन्दर आया और उससे कहा चलो करते हैं रुक क्यों गई ? तो उसने कहा कोई भी आ सकता है चलो यहाँ से | तो मैंने उसको पकड़ा और कहा कोई नहीं आएगा और उसको किस करने लग गया | फिर उसने भी लंड को सहलाना शुरू कर दिया और मैंने उसकी चूत मलना |

उसने सलवार सूट पहना था इसलिए मैंने उसकी कुर्ती ऊपर की और उसके दूध चूसने लगा और एक हाँथ से उसकी चूत सहलाने लगा | वो आह्हह्हाहा अह्ह्ह्हह्ह ऊम्म्मम्म्म्म करने लगी | फिर मैंने उसके पजामे का नाडा खोला और पैंटी सहित उतार दिया | फिर मैंने उसको टेबल पर बैठाया और उसकी चूत चाटने लगा |

उसकी चूत में थोड़े थोड़े से बाल थे लेकिन मेरी हवस ज्यादा थी इसलिए मैंने उन बालों को किनारे किया और उसी चूत चाटता रहा | फिर मैं खड़ा हुआ और अपनी पेंट नीचे करके उससे कहा चुसो इसे | तो वो घुटनों पर आ गई और मेरी आँखों में देखकर कर लंड चूसने लगी |

वो ठीक से मेरे लंड नहीं चूस रही थी इसलिए मैंने कहा पूरा चुसो तो उसने और ज्यादा चुसना शुरू किया और फिर मेरे लंड को आजु बाजु से चाटने लगी | फिर जाके मुझे थोड़ी शांति मिली और अब मेरा लंड पूरी तरह से खड़ा हो चुका था | तो मैंने उसको फिर से टेबल पर बैठाया आयर उसकी चूत पे लंड रगड़ते हुए

धीरे से उसकी चूत में अपना लंड सरका दिया | मेरा लंड का सिर्फ उपरी हिस्सा ही  अन्दर गया तो मैंने थोडा और जोर लगाया और अपना लंड अन्दर करने लगा |

वो मुझे कहने लगी निकालो बाहर दर्द हो रहा है लेकिन मैं उसकी चूत में धीरे धीर लंड अन्दर बाहर करता रहा और वो आहाह्हह्ह ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ईएस्स्स्स स्स्स्सस्स्स्स आअह्ह्ह्ह करती रही |

थोड़ी देर में उसका दर्द कम होने लगा तो मैंने उसको उतारा और घुमाके टेबल पर झुकाया और पीछे से उसकी चूत में लंड डाल के उसको चोदना शुरू कर दिया | वो आह्ह्ह्ह ऊउह्ह्ह्ह ह्ह्ह्हह्ह्हुह्ह स्स्स्सस्स्स्स आअह्ह्ह्ह करे जा रही थी लेकिन मैं ज़ोर ज़ोर से उसको चोदे जा रहा था | फिर थोड़ी देर में मेरा मुट्ठ निकलने वाला था

तो मैंने उसको बैठा दिया और उसके मुंह में लैंड डाल के उसको चुसाने लगा | वो मेरा लंड चूसती रही और मैंने सारा मुट्ठ उसके मुंह में ही गिरा दिया और फिर हमने कपडे पहने और घर चले गए |

अब जब भी हमारी कॉलेज में देर रात तक ड्यूटी लगती है तो हम चुदाई ज़रूर करते है और अगर मन हुआ तो कहीं होटल में रूम लेकर वहां पर मौज उड़ा लेते है | दोस्तों आप सब को मेरी कहानी कैसी लगी कमेंट में बताइयेगा | मुझे इंतजार रहेगा |

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