फार्महाउस में हसीना के हुस्न का जाम पिया

"If you'd like to submit a paid guest post or sponsor a post on our website, please contact us at

Rate this post

मेरा नाम राजीव है मैं एक छोटे से कस्बे का रहने वाला हूं, मेरी उम्र 24 वर्ष है। मैं बचपन से ही अपने माता पिता के प्यार से वंचित रह गया क्योंकि उनकी काफी वर्षों पहले ही मृत्यु हो गई थी।

Build Your Dream Website Join Now
अपनी वेबसाइट बनाए Join Now

मैं हमेशा ही अपने आप को बहुत अकेला महसूस करता था इसीलिए मैं वहां से दो वर्ष पहले चंडीगढ़ चला आया, जब मैं चंडीगढ़ पहुंचा तो मैं किसी को भी नहीं जानता था।

मैं बहुत ही सीधा और शरीफ लड़का हूं इसलिए मैं सोचने लगा कि मैं यहां पर कैसे रहूंगा यदि मैं अपने अंदर बदलाव नहीं करता तो शायद मैं चंडीगढ़ में नहीं रह पाता।

मुझे चंडीगढ़ में कुछ महीने ही हुए थे, मेरी मुलाकात उस वक्त प्रदीप के साथ हो गई। जब मैं प्रदीप से मिला तो मुझे ऐसा लगा जैसे मैं उसे काफी पहले से जानता हूं, उससे मेरी बड़ी अच्छी दोस्ती हो गई और मुझे जब भी कुछ जरूरत होती तो मैं प्रदीप को ही कहता। मैं नौकरी के लिए भी बहुत महनत कर रहा था

उस वक्त मेरी नौकरी भी नहीं लग पा रही थी। जब मेरी नौकरी लग गई तो मैं जिस जगह रहता था मैं सोचने लगा वहां से मैं कहीं और रहने के लिए चला जाता हूं।

मैंने जब प्रदीप को अपने घर बदलने के लिए कहा तो प्रदीप ने कहा कि तुम चिंता मत करो मैं तुम्हारे लिए कहीं अच्छी जगह पर घर देख लूंगा, जहां पर कि तुम्हें अपने ऑफिस जाने में भी कोई दिक्कत ना हो।

प्रदीप ने मेरे लिए एक घर देख लिया और मैं वहां से अपने ऑफिस आराम से जा सकता था क्योंकि वहां से मेरे ऑफिस की दूरी ज्यादा नहीं थी।

प्रदीप हमेशा ही मेरे लिए खड़ा रहता और वह हमेशा ही मुझे कहता तुम्हारे अंदर ना जाने क्या बात है, मैं तुम्हें कभी भी मना नहीं कर पाता और हम दोनों एक दूसरे की मदद के लिए हमेशा ही आगे रहते हैं।

एक दिन प्रदीप मुझे अपने घर पर ले गया, जब मैं उसकी मां से मिला तो मुझे ऐसा लगा जैसे कहीं ना कहीं मैं भी अपनी मां को मिस कर रहा हूं।

उसकी मां मेरे साथ बैठी हुई थी, मैंने उन्हें अपने बारे में बताया तो वह बहुत दुखी हो गई और कहने लगी तुम्हारे साथ तो बहुत ही बुरा हुआ। मैंने उन्हें बताया कि मुझे अकेले रहते हुए काफी समय हो चुका है,

मैं अपने माता पिता को खोने के बाद अपने चाचा चाची के साथ रहने लगा, मेरे चाचा चाची ने ही मेरी देखभाल की लेकिन वह लोग मुझे मेरे माता-पिता के जितना प्यार नहीं दे पाए इसीलिए मैं चंडीगढ़ चला आया, मुझे ज्यादा समय चंडीगढ़ में नहीं हुआ है।

उसकी मम्मी मुझे कहने लगी तुम्हें जब भी कोई आवश्यकता हो तो तुम मुझे बता देना, तुम बेझिझक हमारे घर पर आ जाना। उसकी मम्मी से मिलकर मुझे ऐसा लगा जैसे प्रदीप की मां में मुझे मेरी मां की झलक दिखाई दे रही है

और मैं बहुत भावुक हो गया, मैं उस दिन इतना ज्यादा भावुक हो गया कि मैं जिंदगी में आज तक कभी भी इतना भावुक नहीं हुआ था। मैंने अपने माता पिता को खोने के बाद अपने अंदर बहुत ही हिम्मत रखी है और मैंने कभी भी अपनी हिम्मत नहीं टूटने दी। एक दिन जब मैं अपने दफ्तर में था तो उस वक्त मुझे प्रदीप का फोन आया,

प्रदीप मुझे कहने लगा तुम ऑफिस से शाम को कब लौट रहे हो, मैंने उसे बताया कि मैं ऑफिस से शाम को 6 बजे तक आ जाऊंगा। मैंने प्रदीप से पूछा क्या कुछ काम था, वह कहने लगा नहीं काम तो कुछ नहीं था

बस ऐसे ही तुम्हें पूछ रहा था यदि तुम्हारे पास समय हो तो हम लोग आज कहीं घूमने के लिए चलते हैं, मैंने उससे कहा मुझे तो आने में शाम हो जाएगी, शाम के बाद तुम कोई प्रोग्राम बनाते हो तो मैं तुम्हारे साथ चलूंगा।

प्रदीप कहने लगा ठीक है तुम आ जाओ उसके बाद ही हम लोग कुछ प्रोग्राम बनाते हैं। मैंने ऑफिस में जल्दी ही अपना काम कर लिया और मैं 6 बजे अपने ऑफिस से निकल गया। जब मैं 6 बजे अपने ऑफिस से निकला तो प्रदीप मुझे मेरे ऑफिस लेने के लिए आ गया। मैं प्रदीप के साथ उसकी बाइक पर बैठ गया, मैं उसकी बाइक पर बैठा।

वह मुझे कहने लगा आज हम लोग घूमने के लिए चल रहे हैं, मैंने उससे कहा कि आज तुम्हारा अचानक से अच्छा मूड क्यों बन गया, वह कहने लगा तुम मेरे साथ चलो तो तुम्हें भी अच्छा लगेगा।

मैंने उससे कहा कम से कम मुझे फ्रेश तो होने दो, मुझे ऐसे ही तुम कहां लेकर जा रहे हो। वह कहने लगा बस तुम चुपचाप बैठे रहो, तुम कुछ भी मत बोलना, मैंने कहा ठीक है मैं चुपचाप बैठ जाता हूं।

मैं प्रदीप के पीछे उसकी बाइक पर बैठा रहा और मैं सोच रहा था कि प्रदीप मुझे कहां लेकर जा रहा होगा, मुझे बिल्कुल भी समझ नहीं आ रहा था, वह मुझसे यह बात भी नहीं कह रहा था कि वह मुझे कहां लेकर जा रहा है। प्रदीप मुझे एक फार्महाउस में ले गया, हम लोग जब उस फार्महाउस  मे जा रहा थे तो मैं उस फार्महाउस को देखकर अपने आप को नहीं रोक पाया मैंने प्रदीप से पूछा यह किसका फार्म हाउस है।

वह कहने लगा यह मेरे दोस्त का फार्महाउस है तुम अंदर चलो जब हम दोनो अंदर गए तो वहां एक मस्ती लड़की बैठी हुई थी, मुझे लगा शायद वह उनकी दोस्त होगी लेकिन जब मैं उसे बात करने लगा तो मुझे लग गया यह एक जुगाड़ है। मैंने उसके हाथ को पकड़ लिया और उसके स्तनों को दबाने लगा।

प्रदीप के जितने भी दोस्त थे वह उस लडकी से अश्लील बातें कर रहे थे। सब लोगों ने उसे बारी बारी से चोदा जब मैं उसे चोदने के लिए रूम के अंदर गया तो वह नंगी लेटी हुई थी, उसका बदन गोरा था।

मैं उसे देख कर अपने आप को नहीं रोक पाया मै जब उसके स्तनों को दबाने लगा तो मैंने उसके स्तनों को बड़ी जोर से दबाया, वह पूरे मूड में आ गई। उसने अपने आप ही मेरे लंड को बाहर निकालते हुए

अपने मुंह के अंदर ले लिया और मेरे लंड को  सकिंग करने लगी। उसने बड़े अच्छे से मेरे लंड को सकिंग किया मेरा लंड चूसते हुए उसने अपने मुंह के अंदर बहर करने लगी, वह मुझे कहने लगी तुम्हारा लंड तो बड़ा ही मोटा और तगड़ा है।

मैंने भी अपने लंड पर कंडोम लगा लिया और उसकी योनि के अंदर मैंने अपने लंड को डाला तो उसकी चूत पूरी गीली थी मैंने जैसे ही उसकी योनि के अंदर अपना मोटा लंड डाला तो वह चिल्ला उठी और कहने लगी तुम्हारा लंड सबसे ज्यादा मोटा है जितने भी तुम्हारे दोस्तों ने मेरी चूत मारी है उनमें से तुम्हारा लंड मुझे ऐसा लगा जैसे वह मुझे अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। मैं उसे धक्के दे रहा था तो उसके स्तन हिल रहे थे,

मै उसके स्तनों का भी रसपान अपने मुंह में लेकर करता। जब मैं उसके स्तनों को चूस रहा था तो वह मुझे कहने लगी तुम मेरे स्तनों पर अपने दांत के निशान मार दो ताकि मुझे जब भी तुम्हारी याद आए तो मैं तुम्हारे निशान को देख लू। वह मेरा पूरा साथ दे रही थी और मैं भी उसे बड़ी तेज गति से धक्के देता जाता।

मैंने उसे इतनी तेज गति से चोदा जैसे ही मेरा वीर्य उसकी योनि के अंदर गिरा तो मुझे बड़ा अच्छा महसूस हुआ। मैंने अपने लंड को उसकी योनि से बाहर निकाल लिया। मैंने जब दोबारा से अपने लंड पर कंडोम चढ़ाया तो

मैंने उसे अपने ऊपर आने को कहा। वह मेरे ऊपर लेट गई और उसने अपने आप ही मेरे लंड को अपनी योनि के अंदर ले लिया। उसने जैसे ही मेरा लंड अपनी योनि के अंदर लिया तो मैंने बड़ी तेजी से उसे झटके देना शुरू किया।

मैंने उसे इतनी तेज झटके मारे की वह बहुत खुश हो रही थी और अपनी चूतडो को वह मेरे लंड पर ऊपर नीचे करने लगी। वह जिस प्रकार से अपनी चूतडो को हिला रही थी मुझे बड़ा आनंद आ रहा था।

उसने तेज गति से अपनी चूतडो को हिलाना शुरू कर दिया जैसे ही उसकी बड़ी बड़ी चूतडे ऊपर नीचे होती मुझे एक अलग ही अनुभूति होती वह भी बहुत खुश प्रतीत हो रही थी।

मैंने उसके बड़े स्तनों को अपने मुंह में ले लिया और उसे चूसने लगा। मैंने उसके साथ 10 मिनट तक संभोग किया लेकिन 10 मिनट बाद मुझे ऐसा लगा जैसे मेरा वीर्य पतन हो गया हो। जब मैं उसे चोदकर बाहर निकला तो मेरी छाती बड़ी चौडी हो रही थी, मैं बहुत खुश था प्रदीप ने मुझसे पूछा तुम्हें देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा है

जैसे तुम बडे खुश हो। मैंने उसे बताया कि तुमने तो एक नंबर का माल रखा हुआ था प्रदीप और मैं रात भर उस  फार्महाउस में रुके, हमने उस हसीना के हुस्न का रात भर जाम पिया।

Leave a comment