गाँव की चूत का स्वाद ही अलग है

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Gaanv ki chut ka swad hi alag hai: desi sex stories, hindi chudai ki kahani दोस्तों मेरा नाम मुकेश है। मैं एक बीमा  एजेंट हूं। मैं काफी समय से बीमा एजेंट हूं। मुझे इसमें तकरीबन 9 साल हो चुके हैं।

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मेरी अब सभी लोगों से अच्छी जान पहचान हो चुकी है। मैं सबके बीमा करवाता रहता हूं। वह लोग मुझे रेफरेंस भी देते रहते हैं नए-नए जिससे कि मैं उन लोगों का भी बीमा करवाता हूं।

इसी से मैं अपने घर का गुजारा करता हूं। मेरा जीवन अच्छे से चल रहा है। मेरे घर में मेरी बीवी मेरी बुजुर्ग मां और मेरे दो बच्चे हैं। मैं सुबह अपने काम पर निकल जाता हूं और शाम को ही घर पर लौटता हूं।

मार्केट में मुझे सब होगा पहचानते हैं कि मैं बीमा करवाता हूं तो जिसको भी मुझसे करवाना होता है वह मुझसे बीमा करवा लेता है। यह मेरे लिए काफी अच्छी बात होती है कि मुझे अब पहले की तरह भागादौड़ी नहीं करनी पड़ती।

क्योंकि पहले मुझे बहुत भागादौड़ी करनी पड़ती थी। लेकिन अब सब मेरे परिचित हो चुके हैं। सब लोग मुझसे ही बीमा करवाते हैं और यह मेरे लिए अच्छा भी होता है।

इस बार में बीमा के सिलसिले में अपने पड़ोस में ही शीतल भाभी के घर पर ग।या शीतल भाभी बहुत ही हॉट है। वह जब अपनी टाईट सलवार और कुर्ता पहन कर बाहर निकलती हैं। तो पूरा मोहल्ला उनके पीछे पीछे चल पड़ता है।

जिससे कि यह प्रतीत होता है कि सब उन्हें चोदना चाहते हैं। लेकिन कोई भी उन्हें चोद नहीं पाया अभी तक, मेरा भी बहुत मन है उन्हें चोदने का लेकिन ऐसा मौका कभी आज तक मिला भी नहीं और ना उन्होंने कुछ

इस तरीके से इशारा किया। ऐसा कभी हो पाए जिससे मैं उनके साथ संभोग कर पाऊं या फिर उनके साथ कभी अच्छे से सेक्स करू।

मैं शीतल भाभी के घर पहुंचा। मैंने उनके घर की घंटी बजाई तो उन्होंने जैसे ही दरवाजा खोला। तो उन्होंने एक वाइट सलवार और कुर्ता पहना हुआ था। सलवार से उनकी गांड का ऊभार और उनके स्तन साफ साफ नजर आ रहे थे। मुझे यह देखकर उन्हें चोदने का मन हो रहा था और मेरा लंड़ खड़ा हो गया था। लेकिन मैं अपने काम से आया था।

तो मैंने उन्हें पूछा कि आपने मुझे फोन कर के बुलाया था क्या कुछ काम था। वह कहने लगी हां बीमा के बारे में मुझे कुछ जानकारी चाहिए थी इसलिए मैंने आप को घर पर बुलाया था। अब उन्होंने मुझे बैठने के लिए बोला।

मैं उनके सोफे पर बैठ गया और उनसे मैंने पूछा कि आपको कौन सा बीमा करवाना है। उन्होंने मुझे बताया कि मुझे इस तरीके का बीमा करवाना है जो आगे फ्यूचर के लिए अच्छा रहे। मैंने जितने भी बीमा थे मैंने सब के बारे में जानकारी दी और उन्होंने कहा कि ठीक है। मैं आपसे कुछ दिनों में करवा लेती हूं।

आप मुझे एक हफ्ते के अंदर संपर्क करना। मैं आपसे वह बीमा करवा लूंगी। अब मैं उनके घर से अपने काम पर निकल गया। लेकिन मेरे मन में शीतल भाभी का ख्याल अभी तक आ रहा था। मैंने उनकी चूतडो को देखा था तो वह बहुत बड़ी-बड़ी थी। जो कि उनके सलवार से साफ साफ दिखाई दे रही थी। मुझे बहुत अच्छा लग रहा था।

जब मैं उनको निहार रहा था। उनके स्तन भी मुझे अब तक  ध्यान में थे। वह भी बहुत बड़े हैं। मैंने अपना आज का काम खत्म किया और मैं अपने घर पर निकल पड़ा। मैं घर पर आया और आराम करने लगा।

एक हफ्ता होने को आ गया और मैंने शीतल भाभी को फोन किया और उन्हें कहा कि आप ने कुछ सोचा है। वह कहने लगी आप घर पर आ जाइए और पैसे लेकर चले जाइए और हमारा बीमा करवा दीजिए। मैंने कहा ठीक है मैं आपके घर में आधे घंटे में पहुंचता हूं। आप पैसे तैयार रखिएगा मैं आ जाता हूं।

अब मैं उनके घर पर पहुंचा तो मैं जैसे ही बेल बजाई तो वह खराब थी और उनका दरवाजा भी खुला हुआ था। मैंने उन्हें आवाज दी तो किसी ने सुना नहीं तो मैं ऐसे ही अंदर चला गया। अब मैं जैसे ही अंदर पहुंचा तो मैंने इधर उधर उनके कमरों में जाकर देखा। वह अपने कमरे में कपड़े बदल रही थी।

मैंने उन्हें देख लिया वो एकदम नंगी मेरे सामने खड़ी थी। उन्होंने भी मुझे देख लिया और वह कहने लगी अरे आपने बेल नहीं बजाई तो मैंने उन्हें कहा बेल तो खराब है। उन्होंने हड़बड़ी में ऐसे ही एक नाइटी को पहन लिया। जिसमें कि उनके ऊभार साफ साफ दिखाई दे रहे थे। उनकी चूतडे भी साफ साफ दिखाई दे रही थी।

ऐसे ही बाहर आकर मेरे सामने सोफे पर बैठ गई। अब वह मुझसे बात करने लगी। कि हमारी बेल खराब हो चुकी है और मैं दरवाजा लगाना भूल गई। इस वजह से ऐसा हुआ उसके लिए मैं आपसे क्षमा मांगता हूं।

मैंने कहा कोई बात नहीं आप तो वैसे भी इतनी सुंदर है। तो हमने देख लिया तो कौन सी आफत आ गई। वह भी मुस्कुराने लगी। जैसे ही वह मेरे सामने बैठी हुई थी तो उन्होंने पैंटी नहीं पहनी हुई थी। उनकी चूत की लकीरें साफ साफ दिखाई दे रही थी। मैंने जैसे ही उनकी लकीरों को देखा तो मुझे उनकी चूत का छेद दिखाई दे रहा था।

उन्होंने मेरी तरफ देखा तो समझ गई कि शायद उनकी चूत नाइटी के अंदर दिखाई दे रही है लेकिन शायद उनका भी आज कुछ मन सेक्स करने का था। उन्होंने अपने पैरों को और खोल दिया जिससे कि मुझे उनकी योनि साफ साफ दिखाई दे रही थी। अब मेरा ध्यान अपने काम से भटककर उनकी योनि पर ही था।

उनकी योनि को ही देखे जा रहा था। मुझसे अब रहा नहीं जा रहा था मैंने उन्हें कहा कि मुझे आपके साथ सेक्स करना है। मुझसे अब रहा नहीं जा रहा है। आपकी योनि कितनी सुंदर है। उसमें एक भी बाल नहीं है। उन्होंने अपने नाइटी को उतार दिया और मेरे सामने नंगी बैठ गई।

मैंने भी जल्दी से अपनी पैंट को उतारते हुए अपने अंडरवियर से अपने लंड़ को बाहर निकाला और पहले तो मैंने उनके स्तनों पर रगड़ना शुरू किया और मैंने उनके मुंह में अपने लंड़ को घुसा दिया। वह मेरे लंड़ को बहुत अच्छे से चूस रही थी। मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था।

उन्होंने उसे चूस चूस कर पूरा लाल कर दिया था। मैंने भी उनके गोरे गोरे स्तनों को देखा और पहले तो मैं हाथ से दबाने लगा। कुछ समय तक मैंने अपने लंड़ को वहां पर रगड़ा और अब मैं अपने मुंह से उनके निप्पलों अंदर ले रहा था। मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। जब मैं उनके निप्पल को अपने मुंह के अंदर ले रहा था।

मैंने उनके स्तनों को जोरके दबाया। तो उनके स्तनों से दूध निकल रहा था। वह मुझे बहुत अच्छा लगा और मैंने उनके दूध को पी लिया। मैंने उन्हें वहीं सोफे पर लेटा कर उनकी दोनों टांगों को अपने कंधों पर रखते हुए।

उनकी गोरी और चिकनी योनि में जैसे ही अपने लंड़ को लगाया तो उनकी चूत बहुत ही गर्म हो रखी थी और गीली भी हो रखी थी। मैंने अपने लंड़ को उनकी योनि में डाल दिया। उनकी योनि अभी भी बहुत टाइट थी।

तो मुझे काफी मेहनत करनी पड़ी। उनकी योनि में लंड़ डालने के लिए जैसे ही मैंने उनकी योनि के अंदर तक अपने लंड़ को उतार दिया। तो मेरा लंड़ उन की चूत की गहराईयों में खो गया। मुझे बहुत अच्छा लग रहा था।

जब मैं उन्हें धक्के मार रहा था। उनकी गांड़ मेरे पैरों से टकरा रही थी और मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। ऐसा करते हुए मैंने 200 धक्के मारे और मेरा वीर्य गिरने को हो गया जैसे ही मेरा वीर्य गिरने वाला था।

मैंने उनके स्तनों पर अपना वीर्य गिरा दिया और उन्हें बहुत अच्छा लगा। लेकिन उनका मन अभी भी नहीं भरा था और वह अपने आप ही सोफे पर अपने पेट को सोफे की तरफ करते हुए अपनी गांड को मेरी तरफ कर दिया।

और मुझे कहने लगी मुझे ऐसे में घोड़ी बनाकर करो। मैंने धीरे से उनकी योनि में अपने लंड़ को दोबारा से प्रवेश करवाया और धक्के मारने शुरू कर दिया। मैंने उनकी गांड़ को पकड़ा हुआ था जो कि बहुत बड़ी-बड़ी थी।

मुझे अब उनकी गांड़ बहुत करीब से दिखाई दे रही थी। मैं जैसे ही धक्के मारता जाता तो उनकी गांड मेरे और करीब आ जाती। जिससे मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। 15 मिनट तक मैंने उन्हें बहुत ही अच्छे से चोदा अब मेरा टेंपरेचर बहुत हाई हो गया था और मेरा वीर्य भी निकलने वाला था। मैंने उनकी योनि के अंदर ही अपने वीर्य को गिरा दिया।

वह थोडी शांत हुई क्योंकि उनका भी मेरे साथ ही झड़ चुका था और वह मुझे कहने लगी तुमने काफी अच्छी तरीके से मुझे आज शांत किया। मैंने उनसे पूछा आप तो मोहल्ले में किसी से भी नहीं चुदवाती हैं।

तो मुझसे कैसे करवाया वह कहने लगी आज तुम्हारी किस्मत बहुत अच्छी है क्योंकि आज मेरा मन बहुत ज्यादा हो रहा था। इसलिए तुम खुशनसीब हो जो तुम्हें मेरी चूत के मजे मिले।

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