लागी चूत की धुन

"If you'd like to submit a paid guest post or sponsor a post on our website, please contact us at

4.2/5 - (6 votes)

मेरा नाम संगीता है और मैं आगरा की रहने वाली हूं। मुझे एयर होस्टेस बनना था तो मैं सोचने लगी कि मुझे कहीं अच्छी जगह सही कोर्स करना चाहिए।

Build Your Dream Website Join Now
अपनी वेबसाइट बनाए Join Now

इसलिए मैंने अपने पिताजी से बात की, कि मैं दिल्ली जाना चाहती हूं और वहीं से मैं कोर्स करना चाहती हूं। वह कहने लगे कि तुम कुछ और कर लो लेकिन दिल्ली मत जाओ।

वह बिल्कुल भी नहीं चाहते थे कि मैं घर से दूर रहूं। क्योंकि वह लोग मुझे बहुत ही प्यार करते थे और वह बिल्कुल भी नहीं चाहते थे कि मैं घर से दूर रहकर अपनी पढ़ाई करूं।

परंतु मेरे पास भी कोई ऑप्शन नहीं था सिवाय दिल्ली जाने के। मैंने सोचा कि मैं दिल्ली चली ही जाती हूं। मैंने अपने पिताजी को बहुत ज्यादा फोर्स किया।

जिससे की वह मना नहीं कर पाए और कहने लगे ठीक है अब तुम जिद कर रही हो तो तुम दिल्ली चली ही जाओ। मेरे कहने से अब तुम रुकने वाली तो हो नहीं। क्योंकि तुम्हारी भी अपनी जिंदगी है और तुम्हें भी कुछ और करना है। तुमने अपने बारे में अच्छा ही सोचा होगा।

उन्होंने मुझे कहा तुम एक बार अपने भाई से बात कर लेना और वह तुम्हारे लिए दिल्ली में व्यवस्था करवा देगा। क्योंकि उसका दिल्ली आना जाना लगा रहता है।

मैंने उन्हें कहा ठीक है मैं भैया से बात कर लूंगी और वह दिल्ली में मेरे लिए कहीं रहने के लिए व्यवस्था कर देंगे। मेरे भैया एक मार्केटिंग कंपनी में है और उनका दिल्ली में आना जाना लगा रहता है।

क्योंकि उनका दिल्ली में ही हेड ऑफिस है। इस वजह से उन्हें दिल्ली अक्सर जाना पड़ जाता है।

अब मैंने अपने भैया से बात की और उन्हें बताया कि आप मेरे लिए कहीं अच्छी जगह पर रहने की व्यवस्था कर देना जिससे कि मुझे कोई भी दिक्कत ना हो।

वह कहने लगे ठीक है मैं इस बार दिल्ली जाऊंगा तो तुम्हारे लिए कहीं अच्छी जगह पर रहने की व्यवस्था करवा दूंगा। तुम उसकी चिंता बिल्कुल भी मत करो और कुछ दिनों बाद जब वह दिल्ली चले गए तो उन्होंने मेरे लिए एक जगह घर ले लिया।

वह जब वापस आगरा लौटे तो उन्होंने मुझे बताया कि जहां पर मैंने तुम्हारे लिए घर लिया है वहां पर वह आंटी सिर्फ अकेली ही रहती हैं। उनके पति का देहांत हो चुका है और उनका एक लड़का है जो कि विदेश में ही रहता है।

वह भी घर बहुत कम आता है। इसलिए तुम्हें किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होगी और उन्होंने यह भी कह दिया है कि तुम उनके साथ ही खाना खा लिया करना। मैं इस बात से बहुत ही खुश हुई और मैंने अपने भैया को थैंक्यू कहा।

वह कहने लगे तुम्हें थैंक्यू कहने की आवश्यकता नहीं है। यह तो मेरी जिम्मेदारी है इसलिए मुझे तो यह सब करना ही था। जब मैं दिल्ली गई तो मैं उन आंटी से मिली।

वह बहुत ही अच्छी थी और मुझसे पूछने लगे कि तुम क्या करने वाली हो। मैंने उन्हें बताया कि मैं एयर होस्टेस का कोर्स करने वाली हूं। जिस वजह से मैंने दिल्ली में ही एडमिशन लिया है।

वो कहने लगी ये तो बहुत ही अच्छी बात है। अब मैं उन आंटी के साथ ही रहने लगी। उनके साथ मेरा घर जैसा माहौल ही था। मुझे किसी भी प्रकार की कोई समस्या नहीं थी और ना ही उन्हें मुझसे किसी भी प्रकार की कोई आपत्ति थी। क्योंकि मैं समय से घर पर आ जाती थी और ज्यादा इधर-उधर नहीं जाती।

एक दिन हम लोग बैठे हुए थे तो मुझे कहने लगे कि कुछ दिनों बाद मेरा बेटा भी विदेश से आ रहा है। मैंने उन्हें कहा यह तो बहुत ही अच्छी बात है और कुछ दिनों बाद ही उनका लड़का विदेश से आ गया और उसका नाम रघुवीर है। जब आंटी ने उसे मुझसे मिलाया तो आंटी बहुत ही खुश हो गई और रघुवीर भी बहुत ही अच्छा लड़का है।

वह बातें भी बहुत अच्छी करता है। मुझे तो वह बहुत ही अच्छा लगता है। तो हम लोग साथ में बैठकर काफी समय बिताते थे और हम दोनों बातें किया करते थे।

आंटी को यह सब बहुत पसंद है और वह कभी भी हम लोगों को टोकती नहीं थी। क्योंकि आंटी चाहती थी कि मेरी शादी रघुवीर से हो जाए।

उन्होंने कई बार मुझसे इस बारे में बात भी की लेकिन मैंने उन्हें कहा कि मैं अभी शादी नहीं करना चाहती हूं। कुछ समय बाद मैं इसके बारे में फैसला लूंगी। उन्होंने कहा कोई बात नहीं जब तक तुम्हें लगता है तब तक तुम सोच लो।

उसके बाद तुम फैसला ले लेना। जिस दिन मेरी छुट्टी होती उस दिन रघुवीर के साथ मैं घूमने चले जाया करती और हम लोग बहुत ही मस्ती करते हैं।

वह मुझसे बहुत ही अच्छे से बात करता था और मुझे रघुवीर बहुत ही पसंद था लेकिन फिर भी मुझे ऐसा लगता था कि मुझे अभी कुछ समय अपने लिए चाहिए।

इस वजह से मैं रघुवीर से शादी नहीं करना चाहती थी। उसने भी एक दिन मुझसे पूछ लिया और कहने लगा कि क्या तुम मुझसे शादी करना चाहती हो। मैंने उसे कहा कि शादी तो मैं करना चाहती हूं

लेकिन अभी मुझे थोड़ा समय चाहिए। वह भी समझ चुका था कि मैं उससे शादी करना चाहती हूं। इसलिए वह मेरे बहुत ही नजदीक आ गया और अब मैं उसे अपनी सब बातें बताने लगी।

एक दिन मैं अपने कमरे में ही बैठी हुई थी और मैंने अपने दोनों पैरों को चौड़ा करके बैठी हुई थी।

तभी थोड़ी देर बाद रघुवीर मेरे कमरे में आ गया और वह भी मेरे पास में आकर बैठ गया लेकिन मुझे नहीं पता था कि मेरे दोनों पैरों के बीच में से मेरी चूत दिखाई दे रही है। वह बड़े ध्यान से मेरी चूत को देखे जा रहा था।

अब उसने अचानक से मेरी चूत मे हाथ लगा दिया तो मुझे महसूस हुआ कि मेरी चूत दिखाई दे रही है। मैंने दोनों पैरों को मिला लिया लेकिन तब तक उसने मुझे किस करना शुरू कर दिया और मेरी चूत मे उंगली करने लगा।

अब वह मेरी चूत मे इतनी तेज उंगली कर रहा था मुझे बहुत मजा आ रहा था। उसने मेरे सारे कपड़े उतार दिए और अब मैं उसके लंड को हिलाने लगी मैं बड़ी तेजी से उसके लंड को हिला रही थी और उसे अपने मुंह से अंदर समा लिया। मैंने जब उसके लंड को अपने मुंह में समाया तो मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था।

उसने मेरे दोनों पैरों को चौड़ा करते हुए अपने लंड को मेरी योनि में डाल दिया। जैसे ही उसने मेरी योनि में लंड डाला तो मेरी सील टूट गई और मेरी चूत से खून निकलने लगा मैं बहुत ज्यादा चिल्लाई और वह ऐसे ही मुझे धक्के दिया जा रहा था। वह बड़ी तीव्र गति से मुझे चोदने पर लगा हुआ था।

जब उसका लंड अंदर बाहर होता तो मुझे बहुत ही मजा आता। मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे मेरी चूत मे कुछ बड़ी तेजी से अंदर जा रहा है और फिर बड़ी तेजी से बाहर की तरफ आ रहा है। मुझे अच्छा लग रहा था।

अब वह मेरे स्तनों को दबाकर अपने मुंह में समा लेता जब वह मेरे स्तनों को अपने मुंह में समाता जाता तो मेरी उत्तेजना और बढ़ जाती। उसका माल मेरी योनि के अंदर ही झड़ गया उसने मेरी योनि से अपने लंड को बाहर निकाला और मेरी चूतड़ों को पकड़ते हुए मुझे घोड़ी बना दिया।

उसने मुझे चोदना शुरू कर दिया वह मुझे इतनी तेजी से धक्का मारता कि मेरा पूरा शरीर हिलने पर लगा हुआ था। मेरी चूतडे उसके लंड से टकरा रही थी मुझे बहुत मजा आ रहा था

वह मुझे ऐसे ही बड़ी तेज गति से धक्के मारने पर लगा हुआ था। अब मेरा शरीर पूरा गरम हो गया और मेरा शरीर बिल्कुल भी उसकी गर्मी को बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था।

मेरे अंदर से मुझे कमजोरी महसूस होने लगी और मुझे ऐसा लगा मेरा कुछ झड़ रहा है तब मुझे पता चला कि मेरा झड़ चुका है। लेकिन रघुवीर अब भी मुझे ऐसे ही तीव्र गति से धक्के मारने पर लगा हुआ था।

वह बड़ी ही तेज गति से मुझे धक्के देता जिससे कि मेरी चूतडे उसके लंड से टकरा रही थी और मेरा शरीर गर्म होने लगा। अब वह भी पसीना-पसीना हो गया था और वह भी मेरी गर्मी को बर्दाश्त नहीं कर पाया और उसके लंड से वीर्य गिरने वाला था। उसने अपने लंड को बाहर निकालते हुए मेरी चूतड़ों पर अपने वीर्य को गिरा दिया।

मैं बहुत ही खुश थी जब वह मुझे इस तरीके से चोद रहा था। अब वह अपने घर पर चला गया और हम दोनों अक्सर ही सेक्स कर लिया करते थे लेकिन अब वह विदेश चला गया है इसलिए वह मुझसे फोन पर ही बातें करता है और हम दोनों फोन सेक्स किया करते हैं।

Leave a comment