पहली दफा मेरे लंड को स्वीकारा

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मेरा नाम आशीष है मैं आगरा का रहने वाला हूं। मेरी उम्र 23 वर्ष है मैं। और कॉलेज की पढ़ाई करता हूं।

कुछ दिनों तक मेरे कॉलेज की छुट्टियां पड़ी थी तो मेरी मम्मी मुझे कहने लगी कि बेटा तुम अपने मामा के पास हो आओ उन्हें कुछ काम था और वह काफी समय से मुझे आने के लिए कह रहे हैं

लेकिन मैं उनके पास नहीं जा पा रही हूं क्योंकि घर का काम ही इतना हो जाता है कि मेरा वहां जाना बिलकुल भी संभव नहीं है लेकिन तुम उनके पास चले जाओ। मैंने सोचा कि चलो क्यों ना मामा के पास ही जाया जाए।

मेरे मामा मथुरा में रहते हैं और मैं अपने मामा के घर चला गया। जब मैं अपने मामा के घर पहुंचा तो मेरे मामा ने मुझसे पूछा कि तुम्हारी मम्मी क्यों नहीं आई? मैंने कहा कि मम्मी को घर में काम होता है और पापा की नौकरी का तो आपको पता ही है। उन्हें खाना बनाना भी नहीं आता इसलिए मम्मी को ही उनके साथ रहना पड़ता है।

मामा कहने लगे खैर छोड़ो तुम यह बताओ तुम्हारी पढ़ाई कैसी चल रही है? मैंने कहा मामा पढ़ाई तो ठीक ही चल रही है और कॉलेज में कौन सा इतनी ज्यादा पढ़ाई होती है। मैं जब बैठा हुआ था तो उस वक्त मेरे मामा का लड़का भी आ गया। मेरे मामा का लड़का कॉलेज में पढ़ता है। वह मुझसे छोटा है।

उसने इसी वर्ष कॉलेज में दाखिला लिया है। उसका नाम रोहित है। मैं रोहित के साथ काफी देर तक बैठा हुआ था और जब शाम को हम दोनों बाइक पर बाहर निकले तो मैंने आगे से एक बड़ी ही सुंदर और खूबसूरत लड़की को आते हुए देखा। मैंने रोहित से कहा कि बाइक रोको। वह कहने लगा कि क्या आपको कुछ काम है?

मैंने उसे कहा नहीं मुझे कुछ काम नहीं है। बस मुझे वह लड़की बहुत पसंद आई। जब मैंने उससे यह बात कही तो उस वक्त वह बिल्कुल हमारे बगल से होकर गुजरी। रोहित इधर-उधर देखने लगा। मैंने उससे कहा कि अरे तुम इधर उधर कहां देख रहे हो। हमारे बगल से अभी जो एक लड़की नीले सूट में गुजरी मैं उसकी बात कर रहा हूं।

उसने भी जब पीछे पलट कर देखा तो वह उसका चेहरा नहीं देख पाया। मैंने उसे कहा क्या तुम मुझे बता सकते हो कि वह लड़की कहां रहती है। वह मुझे कहने लगा कि आप इन चक्कर में ना पड़े तो अच्छा होगा।

मेरी भी स्कूल की गर्लफ्रेंड थी। उसने भी किसी और के साथ अब रिलेशन बना लिया है। अब वह किसी और के साथ ही रिलेशन में है। मैंने उसे कहा सब लड़कियां एक जैसी थोड़ी होती है।

अब वह मेरे साथ बातें करने लगा तो मैंने कहा कि तुम्हारे चक्कर में वह लड़की पता नहीं कहां चली गई। फिर हम दोनों भी वहां से निकल गए। रोहित ने मुझे अपने दोस्तों से भी मिलवाया। मैं उसके दोस्तों से मिलकर खुश हुआ क्योंकि उसके दोस्त काफी अच्छे थे वह लोग पढ़ने में भी अच्छे हैं।

मैंने रोहित से कहा कि तुम भी इनकी तरह क्यों नहीं बन जाते? वह कहने लगा मैं बनने की कोशिश करता हूं लेकिन बन नहीं सकता क्योंकि मैं पढ़ने में बिल्कुल भी अच्छा नहीं हूं और मेरा पढ़ाई में मन भी नहीं लगता।

जब मैंने रोहित से कहा कि तुम्हारा पढ़ाई में मन क्यो नहीं लगता तो वह कहने लगा पता नहीं भैया क्यों मेरा पढ़ाई में मन नहीं लगता। मैं उसके दोस्तों के साथ काफी देर तक रुका और जब हम दोनों वहां से घर के लिए निकल रहे थे तो रोहित कहने लगा। मैं आज आपको पानी पूरी खिलाता हूं।

वह मुझे एक ठेली पर ले गया और वहां पर हम दोनों ने पानी पुरी खाई। उस व्यक्ति ने वाकई में अच्छी पानी पूरी बनाई थी। मैंने उससे कहा यह तो अच्छी पानीपुरी बनाता है। हम लोग वहां से घर लौट आए।

जब हम लोग घर लौट आए तो मेरे मामा कहने लगे की तुम लोग आ गए अपने घूम गश्त कर के? मैंने कहा हां मामा जी हम लोग आ गए। मैं अकेला बोर हो रहा था तो सोचा कि कहीं घूम आऊँ।

हम लोग कुछ देर तक टीवी देखते रहे और उसके बाद हम दोनों छत पर गए। हम दोनों आपस में बात कर रहे थे। तभी आगे मैंने उसी लड़की को देखा।

मैंने जब उस लड़की को देखा तो मैंने रोहित को कहा कि यही तो वह लड़की है जो मैंने उस वक्त देखी थी। वह कहने लगा भैया आप भी किसके पीछे पड़ गए यह तो आपको बिल्कुल भी लाइन देने वाली नहीं है।

इसका नाम कुसुम है और यह बड़ी खतरनाक लड़की है यदि कोई इससे कुछ भी ऐसी बात कर दे तो वह अपने पिताजी से कह देती है। उसके पिताजी पुलिस में हैं और उन्होंने एक दो बार तो मेरे दोस्तों की भी धुनाई की इसलिए मैं तो अब इससे दूरी बनाकर ही रखता हूं।

मैंने रोहित से कहा लेकिन मैं तो इस से बात कर के ही रहूंगा। वह कहने लगा भैया आप यह बिलकुल भूल जाइए की आप उससे बात भी कर पाएंगे। मैंने भी कुसुम के पीछे बहुत पापड़ बेले लेकिन आखिरकार

मैंने उससे बात कर ही ली। जब मेरी उससे बात हो गई तो मैंने रोहित से कुसुम की बात कराई तो वह भी बहुत ज्यादा शॉक्ड हो गया और कहने लगा आपको तो मानना ही पड़ेगा। आप तो बड़े खिलाड़ी हो।

कुसुम से तो अच्छे अच्छे लड़के भी बात नहीं कर पाते लेकिन आपने तो उससे बात कर के यह साबित कर दिया कि आप ही मेरे भाई हो। मेरी कुसुम से फोन पर तो बात होने लगी थी

लेकिन उससे मिलने का अवसर मुझे नहीं मिल पा रहा था। मैंने रोहित से कहा यार तुम मुझे कोई ऐसी जगह बताओ जहां पर मैं कुसुम को लेकर जा सकूं और उसे अकेले में बात कर सकू। वह कहने लगा मेरे दोस्त का घर है जो कि बंद ही पड़ा रहता है मैं उससे बात कर लेता हूं।

मैंने कहा ठीक है तुम उससे बात कर लो मैं कुसुम को उसके घर लेकर चला जाऊंगा। मैंने कुसुम से मिलने की इच्छा जाहिर की तो कुसुम मेरी बात को मना नहीं कर पाई। वह कहने लगी मैं सिर्फ 1 घंटे के लिए तुमसे मिल पाऊंगी 1 घंटे से अधिक मैं तुम्हारे साथ नहीं रुक पाऊंगी। मैंने कहा तुम 1 घंटे के लिए तो आओ।

मैंने उसे 1 घंटे के लिए बुला लिया। मैं उसे रोहित के दोस्त के घर लेकर चला गया जब मैं उसे रोहित के दोस्त के घर लेकर गया तो रोहित इतना ज्यादा हरामी है वह खिडकी खोल कर देख रहा था। मैं जब कुसुम से बात करता तो वह सब कुछ देख रहा था मैंने भी अंदर से पर्दा लगा लिया। अब उसे बाहर से कुछ दिखाई नहीं दे रहा था।

मैंने कुसुम के होठों को चूसना शुरू किया तो वह मुझे कहने लगी मैं यह सब नहीं कर सकती  लेकिन मैंने उसके होंठों का रसपान करना शुरू कर दिया।

जब मैं उसके नर्म होठों को अपने होठों से मिलाकर किस करता तो मेरा लंड भी खड़ा हो जाता। मैंने धीरे धीरे उसके कपड़े खोलने शुरू कर दिए।

जब मैंने उसके कपड़े खोल दिए तो मैंने उसे अपनी बाहों में ले लिया। जब वह मेरी बाहों में आ गई तो वह भी अपने आपको अच्छा महसूस करने लगी थी और उसका शरीर पूरा गर्म होने लगा।

मैंने उसके स्तनों पर जैसे ही अपनी जीभ लगाई तो वह उत्तेजित हो गई और अपने मुंह से सिसकियां लेने लगी। मैंने भी उसके पूरे बदन को चाटना शुरू कर दिया था जैसे जैसे मैं उसके बदन का रसपान करता मुझे और भी ज्यादा अच्छा महसूस होता।

उसकी चूत ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया था जैसे ही उसकी चूत में पानी छोड़ना शुरू किया तो मैंने भी अपने लंड को बड़ी गर्मजोशी में उसकी चूत से सटाते हुए अंदर की तरफ डाल दिया।

जैसे ही मेरा लंड उसकी योनि के अंदर घुसा तो मुझे बहुत ही अच्छा महसूस हुआ। जब मेरा पूरा लंड उसकी योनि के अंदर प्रवेश हो गया तो वह अपने मुंह से मादक आवाज में चिल्लाने लगी वह कह रही थी तुमने तो मेरी चूत फाड़ दी मुझे बहुत दर्द हो रहा है। मैंने जैसे ही उसकी योनि की तरफ नजर मारी तो उसकी चूत से खून निकल रहा था।

जब मैंने वह खून देखा तो मेरी उत्तेजना और भी ज्यादा बढ़ गई मुझे बिल्कुल ही फ्रेश माल मिल चुका था मैंने भी उसकी चूत के अंदर बाहर अपने लंड को करना शुरू कर दिया।

मैं उसे इतनी तेजी से धक्के मार रहा था उसका शरीर हिल रहा था वह अपने पैरों को चौड़ा कर लेते लेकिन मुझे उसे धक्के देने में बहुत आनंद आ रहा था।

जैसे ही मेरा वीर्य पतन उसकी योनि के अंदर 10 मिनट बाद हुआ तो मुझे बहुत ही आनंद मिल गया।

2 thoughts on “पहली दफा मेरे लंड को स्वीकारा”

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