तेरी चूत कि ख़ुशी का राज़

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मेरा नाम सोहन है और मैं सूरत का रहने वाला हूं।

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मेरी उम्र 28 वर्ष है।  मेरा अपना ही कपड़ों का व्यापार है। मेरा साड़ियों का कारखाना है।

मैं सूरत में साड़ियों की सप्लाई करता हूं और मेरा काम बहुत ही अच्छे से चल रहा है। हमारा यह काम बहुत ही पुराना है। मेरे दादा के समय से हम लोग करते आ रहे हैं।

हमारे यहां बड़े-बड़े सप्लायर आते हैं और वह हमारे यहां से कपड़े खरीद कर लेकर जाते हैं। मुझे अच्छे से याद है कि मैं अपने दादा जी के साथ यहां पर बचपन से आ रहा हूं और अब मैं इस काम को संभालने लगा हूं।

तो मैं बहुत ही खुश हूं और मेरे दादाजी भी बहुत खुश है। वह मुझे हमेशा कहते रहते हैं कि जिस तरीके से मैंने अपने कारोबार को आगे बढ़ाया है तुम भी उसी तरह इस कारोबार को और ऊंचाइयों पर ले जाना। ताकि मुझे खुशी मिले।

मैं हमेशा से ही अपने दादा जी का बहुत आदर और सम्मान किया करता हूं। मेरे पिताजी और मैं उस काम को अब भी संभाल रहे हैं और मेरे पिताजी  बखूबी काम को संभाल रहे हैं। वह बहुत ही मेहनती किस्म के इंसान हैं।

पिताजी हमेशा से कहते रहते हैं कि कुछ समय बाद तुम इस काम को पूरी तरीके से संभाल लेना। मैं थोड़ा समय अपने घर पर भी देना चाहता हूं। मैंने उन्हें कहा कि आप चिंता मत कीजिए।

मैं सारा काम संभाल लूंगा और आप घर पर ही काम कीजिए। वह यह बात सुनकर बहुत ही खुश होते हैं और कहते हैं कि तुम अब जिम्मेदारी उठाने के काबिल बन चुके हो।

एक बार मैं अपने काम के सिलसिले में अहमदाबाद जा रहा था। मैंने सोचा इस बार मैं बस से अहमदाबाद जाता हूं। मैं बस से अहमदाबाद जाने के लिए तैयार हुआ और अहमदाबाद के लिए निकल पड़ा।

मैं जब बस में बैठा हुआ था तो एक लड़की मेरे पास आकर बैठ गई। मैंने काफी देर तक तो उससे बात नहीं की लेकिन मैंने सोचा कि अब मैं उससे बात कर लेता हूं। तो मैंने उससे बात कर ली। उसका नाम मीना था।

हम दोनों काफी देर तक बात करते रहे और मेरा सफर कटता गया। मुझे पता ही नहीं चल रहा था कब मेरा सफर कट रहा है और मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था। उससे बात करते वक्त उसने मुझसे पूछा तुम क्या करते हो।

मैंने उसे बताया कि हमारा साड़ियों का कारोबार है और यह मेरे दादा के समय से हम लोग कर रहे हैं। मैंने उससे पूछा कि तुम क्या करती हो। वह कहने लगी कि मैं अपने भाई के पास अहमदाबाद जा रही हूं।

वह वहीं पर रहते हैं। मैंने उससे पूछा कि तुम्हारे भैया अहमदाबाद में रहते हैं तो तुम क्या अहमदाबाद में ही रहती हो। वो कहने लगी नहीं हम लोग सूरत के हैं और सूरत में ही रहते हैं।

मैंने जब उससे उसके भाई का नाम पूछा तो मुझे पता चला कि वह तो मेरा ही दोस्त है। मैंने उससे कहा कि वह मेरा दोस्त है और मैं उसे काफी समय से जानता हूं।

यह बात सुनकर वह और भी ज्यादा खुश हो गई। अब हम दोनों ऐसे ही बात करने लगे और मैंने उससे उसका नंबर ले लिया। मैन उसे कहा कि तुम अहमदाबाद पहुंच कर मुझे फोन करना।

बताना कि तुम्हारा भाई कैसा है और उसकी भी मुझ से फोन पर बात कराना। अब हम अहमदाबाद पहुंच गए। अहमदाबाद पहुंच कर मैंने भी अपना काम निपटाया और उसके बाद मैं सूरत वापस लौट आया।

मैं कई दिनों तक अपने कारखाने में जाता रहा और अपने काम पर ही लगा रहा। एक दिन जब मैं अपने घर लौट रहा था तो मैंने रास्ते में मीना को देखा। मीना मुझे देखते ही खुश हो गई और कहने लगी तुम अहमदाबाद से कब लौटे।

मैंने उसे बताया कि मैं तो अगले दिन ही अहमदाबाद से लौट आया था। मैंने उससे पूछा तुम्हारा भाई कैसा है। वह कहने लगी कि वह बहुत अच्छा है और अच्छे से काम कर रहे हैं। मैं यह बात सुन कर बहुत खुश हुआ।

मैंने उससे कहां आओ मैं तुम्हें घर छोड़ देता हूं। उसने कहा नहीं मैं अपनी स्कूटी से घर चली जाऊंगी। अब वह अपनी स्कूटी से घर चली गई और मैं उसे फोन करने लगा। हम दोनों की फोन पर ही बहुत बातें होने लगी।

एक दिन मैंने उसे अपने कारखाने में बुलाया और फिर मैंने उसे अपना कारखाना दिखाया।

तो वो कहने लगी की ये तो बहुत बड़ा है। फिर मैंने उसे कहा कि हां यह हमारे दादा जी के समय से है और अब हमने इस काम को बहुत ज्यादा बडा कर लिया है। मैंने उसे कहा कि तुमने तो इससे पहले शायद कभी इतना बड़ा कारखाना देखा होगा।

वह कहने लगी कि हां मैंने इससे पहले कभी भी नहीं देखा था क्योंकि हमारे घर में कोई भी इतना बड़ा कारखाना नहीं चलाता। अब मेरी मीना से काफी देर तक बात हुई उसके बाद मैंने उसे कहा कि चलो कहीं घूम आते हैं।

मैं उसे अपनी कार में घुमाने ले गया और हम लोगों ने पहले तो एक रेस्टोरेंट में बैठकर लंच किया उसके बाद हम लोग वहां से चल पड़े। जब वह मेरे साथ कार में बैठी हुई थी तो मेरा मन उसे देख कर बहुत खराब हो रहा था और मैं उसके स्तनों को बार-बार देख रहा था।

थोड़ा आगे पर जंगल शुरू होने वाले था तो मैंने वहा पर अपनी गाड़ी को रोक लिया और उसे कहा कि गाड़ी खराब हो गई है। वह थोड़ा टेंशन में आ गई और कहने लगी कि यहां पर तो कोई भी नहीं है। मैंने उसे कहा तुम डरो मत तुम कार के अंदर ही बैठे रहो।

वह कहने लगी कि मुझे बहुत तेज टॉयलेट आ रहा है वह कार के थोड़े से पीछे जाकर मूतने लगी।

मैंने उसे देख लिया और जैसे ही उसने अपने सलवार को ऊपर करने की कोशिश की तो मैंने उसे वहीं दबोच कर लेटा दिया और उसकी चूत मे अपनी उंगली को घुसेड़ने लगा। वह मुझे कहने लगी तुम यह क्या कर रहे हो।

मैंने उसे कहा क्या तुम्हें मजा नहीं आ रहा ऐसा कहते ही मैंने उसके होठों को अपने होठों में ले लिया और उसे चूसने लगा। मैं बहुत देर तक उसे किस करता रहा जो कि उसे भी बहुत अच्छा लगने लगा और

वह भी मेरे होठों को चूसने लगी। अब मैंने उसकी सलवार को उतारते हुए उसकी चूत को चाटना शुरू किया और हम दोनों वहीं झाड़ी में लेटे हुए थे।

मैं उसकी चूत को चाट रहा था और उसकी चूत से पानी का रिसाव हो रहा था। मैंने वह सब पानी अपने मुंह के अंदर अपनी जीभ से चाट लिया।

अब वह पूरे मजे में आ चुकी थी और तैयार हो चुकी थी मुझसे चूदने के लिए मैंने भी तुरंत अपने लंड को बाहर निकालते हुए उसके हाथों में पकड़ा दिया और वह मेरे लंड को हिलाने लगी।

वह जैसे ही मेरे लंड को हिला रही थी तो मुझे बहुत अच्छा लग रहा था और उसने अपने मुंह के अंदर भी मेरे लंड को ले लिया। मैंने भी उसके मुंह के अंदर धक्का देना शुरू कर दिया कुछ देर ऐसा करने के बाद मैंने उसके स्तनों का रसपान करना शुरू किया।

मैं उसके स्तनों को बहुत ही अच्छे से चूस रहा था और उसके निप्पलों को भी बहुत ही अच्छे से अपने मुंह में लेकर चूसता जाता। अब मैंने उसके दोनों पैरों को खोलते हुए अपने मोटे लंड को उसकी चूत में डाल दिया जैसे ही मैंने अंदर डाला तो उसकी बहुत ज्यादा टाइट चूत थी।

मेरा लंड अंदर नहीं जा रहा था लेकिन फिर भी मैंने कोशिश करके उसके चूत से मैंने अपने लंड को सटा दिया और ऐसे ही अब मैं बड़ी तीव्रता से उसे चोदने लगा। मुझे बहुत ही आनंद आ रहा था जब मैं उसकी मे अपने लंड को डाले जा रहा था। मैं ऐसे ही उसे झटके देता और उसका शरीर गर्म होने लगा।

मुझे भी बहुत मजा आ रहा था जब मैं उसकी चूत मे अपने लंड को डालता। ऐसे ही मैं उसे बहुत देर तक चोदता रहा उसका शरीर पूरा गरम हो चुका था और वह बहुत तेज आवाज में चिल्लाने लगी।

मैंने उसकी गांड को भी दबाना शुरु कर दिया और उसे अब उल्टा करते हुए उसके चूतड़ों के अंदर से उसकी योनि में मैंने अपने लंड को डाल दिया।  मैं उसके ऊपर से ऐसे ही लेट कर उसे चोदता जाता।

मैं उसे बड़ी तीव्र गति से धक्के मार रहा था जिससे कि उसका पूरा शरीर हिलने लगा और वह छटपटाने लगी। मैं अब भी उसे ऐसे ही चोदने पर भी लगा हुआ था उसकी चूत मारने मे मुझे बहुत ही आनंद आ रहा था और मुझे बहुत मजा आ रहा था। जब मैं उसकी चूत में अपने लंड को डालता जाता मुझे ऐसा लग रहा था

जैसे मैं किसी कच्ची कली की चूत में लंड डाल रहा हूं। कुछ देर बाद मेरा वीर्य पतन हो गया और मैंने अपने लंड को उसकी चूत से बाहर निकाल दिया। अब हम दोनों ने अपने अपने कपड़े पहने और वह भी बहुत खुश थी।

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