योनि को नहलाया पहली रात में । hindi sex story । sex story

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नीलम दौड़ती हुई कमरे की तरफ आई और कहने लगी दीदी जल्दी से तैयार हो जाओ मैंने नीलम से कहा क्या हुआ तो नीलम कहने लगी दीदी बस तुम जल्दी से तैयार हो जाओ। मैं मेज पर बैठकर अपनी किताब पढ़ रही थी मैंने उसे कहा जब तक तुम मुझे बताओगी नहीं कि हुआ क्या है तब तक मैं तैयार नही होउंगी।

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नीलम कहने लगी मम्मी ने आपके लिए संदेशा भिजवाया है कि आप तैयार हो जाओ मैंने नीलम से कहा लेकिन उन्होंने मुझे तैयार होने के लिए क्यों कहा क्या हम लोग कहीं जा रहे हैं।

वह कहने लगी दीदी आपको देखने के लिए लड़के वाले आ रहे हैं यह सुनते ही मैं कमरे से बाहर सीधे मां के पास गई मैंने मां से कहा मां नीलम मुझसे क्या कह रही है। मां कहने लगी तुम अभी तक तैयार नहीं हुई हो तुम जल्दी से तैयार हो जाओ कुसुम, मैंने मां से कहा मां मैंने आपको कहा ना मुझे शादी नहीं करनी है अभी मुझे अपनी पढ़ाई करनी है।

मेरी मां ने मुझे सख्त लहजे में कहा बेटा आज नहीं तो कल तुम्हें शादी तो करनी ही है ना और तुम्हें मालूम है तुम्हारे पिताजी ने तुम दोनों को पढ़ाने के लिए अब तक ना जाने कितना पैसा खर्च कर दिया है और उनके ऊपर भी तो तुम्हारी जिम्मेदारी है। मैंने मां से कहा कि मां लेकिन मुझे अभी शादी नहीं करनी है

मुझे थोड़ा और समय चाहिए मां कहने लगी बेटा तुम्हें पिछले दो वर्षों से समय ही तो दे रहे थे लेकिन अब तुम्हारी उम्र 27 वर्ष हो चुकी है और तुम्हारे कॉलेज को पूरे हुए भी समय हो चुका है अब तुम ही बताओ कि क्या तुम्हें शादी नहीं करनी चाहिए। जब यह बात मेरी मां ने मुझसे कही तो मुझे भी लगा कि मां की बात मान लेनी चाहिए

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क्योंकि मैंने ही उनसे दो वर्ष का समय मांगा था लेकिन दो वर्षों में मैं कुछ भी ना कर सकी और मेरे लिए अब रिश्ते आने लगे थे। मैं भी चुपचाप अपने रूम में चली गई और तैयार हो गई मैंने पिंक रंग के अपने पटियाला सूट और सलवार को पहन लिया। मैंने नीलम से पूछा नीलम मैं कैसी लग रही हूं

नीलम कहने लगी दीदी तुम तो आज बहुत ज्यादा सुंदर लग रही हो। कुछ ही समय बाद लड़के वाले भी आ गए जैसे ही लड़के वाले आए तो नीलम मेरे कमरे की खिड़की से बार-बार बाहर झांक कर देख रही थी और कहने लगी दीदी तुम भी तो देखो लड़का कैसा लगता है।

मैंने नीलम से कहा नीलम तुम भी कैसी बात कर रही हो थोड़ी सी तो शर्म कर लिया करो यदि उन्होंने देख लिया तो वह लोग हमारे बारे में क्या सोचेंगे। नीलम मुझे कहने लगी दीदी कोई बात नहीं उन्हें जो सोचना है

सोचने दो लेकिन मैं तो अपने होने वाले जीजू को देखकर ही रहूंगी मैंने नीलम से कहा तुम्हें कैसे पता कि वह तुम्हारे होने वाले जीजा हैं। नीलम कहने लगी दीदी मुझे लगता है कि आपको लड़के को देख कर

उसे मना करने की कोई वजह मिलेगी ही नहीं। मैंने भी खिड़की से झांक कर बाहर देखा तो वाकई में जो लड़का मुझे देखने के लिए आया था वह देखने में बहुत ही ज्यादा हैंडसम और उनका व्यक्तित्व ऐसा लग रहा था

कि वह कोई ऑफिसर हैं लेकिन मुझे इस बारे में ज्यादा कुछ पता नहीं था। मेरी मां ने मुझे आवाज लगाते हुए कहा कि बेटा जरा चाय ले आना मैंने भी रसोई से चाय को ट्रे में रखा और बाहर आ गई लेकिन मेरे हाथ कांप रहे थे

और मुझे बहुत ज्यादा घबराहट हो रही थी। जैसे ही मैंने ट्रे को टेबल पर रखा तो मेरी नजर उस लड़के पर पड़ी और उस लड़के को देख कर मुझे ऐसा लगा कि जैसे पापा मम्मी ने मेरे लिए बिल्कुल सही लड़का चुना है

मुझे लगा कि मैं उनसे जरूर बात करूंगी। मां ने मुझे कहा कि बेटा यहीं बैठ जाओ, मैं सोफे पर बैठी और तभी लड़के के साथ आई हुई उनकी मां मुझसे पूछने लगी कि बेटा तुमने क्या किया है। मैंने उन्हें बताया कि मेरी बीएससी की पढ़ाई तीन वर्ष पहले खत्म हो गई थी और उसके बाद मैं सरकारी नौकरी के लिए तैयारी कर रही थी।

उनकी मां ने मुझसे मेरा नाम भी पूछा और मैंने जब उन्हें अपना नाम बताया तो उसके बाद मैं अपने कमरे में आ गई मुझे काफी शर्म लग रही थी और पहली बार मुझे ऐसा महसूस हुआ कि जैसे मैं शरमा रही हूं

क्योंकि मैं कभी भी शरमाती नहीं हूं। अब मैं अपने कमरे में आई तो मुझसे मेरी बहन नीलम पूछने लगी कि आपको लड़का कैसा लगा मैंने नीलम से कहा नीलम तुम भी पता नहीं मुझे कितना परेशान कर रही हो तुमसे पता नहीं कब मेरा पीछा छूटेगा।

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जब मैंने नीलम से यह बात कही तो नीलम कहने लगी बस दीदी कुछ ही समय बाद तुम्हारी शादी हो जाएगी और तुम अपने ससुराल चली जाओगी उसके बाद तो हम दोनों एक दूसरे से अलग हो जाएंगे।

मैंने भी नीलम की तरफ देखा और उसे अपने गले लगा लिया मुझे भी लगा कि नीलम बिल्कुल सही कह रही है शादी होने के बाद तो मैं अपने ससुराल ही चली जाऊंगी। नीलम मुझे कहने लगी दीदी तुम भी मुझे बोर मत करो मैंने नीलम से कहा हां बाबा ठीक है अब इतना भाव भी मत खाओ की मुझे तुम्हे कुछ खिलाना पड़े।

नीलम मुझे कहने लगी कि दीदी आपको मुझे खिलाना तो पड़ेगा ही अब आपकी शादी जो पक्की हो जाएगी मैंने नीलम से कहा देखते हैं और कुछ देर बाद मम्मी कमरे में आई तो वह कहने लगी कि तुम्हें लड़का कैसा लगा।

मैंने मम्मी से कुछ भी नहीं कहा मम्मी समझ गई कि मुझे वह लड़का पसंद आ गया है मुझे उस लड़के का नाम भी नहीं पता था मैंने मम्मी से कहा मम्मी क्या वह लोग चले गए। मम्मी कहने लगी हां कुसुम बेटा वह लोग तो चले गए मैंने

मम्मी से कहा लेकिन पापा कहां है आज पापा सुबह से नहीं दिखाई दे रहे हैं मम्मी कहने लगी तुम्हें नहीं मालूम कि तुम्हारे पापा अपने दोस्त के लड़के की शादी में गए हुए हैं। मैंने मम्मी से कहा मुझे तो उसके बारे में कोई जानकारी नहीं है पापा ने भी हमें कुछ नहीं बताया मुझे तो लगा था कि वह अपने ऑफिस गए होंगे।

मम्मी कहने लगी नहीं बेटा वह अपने दोस्त के लड़के की शादी में गए हुए हैं कल सुबह वह लौट आएंगे। अब हम लोग साथ में बैठ कर बात कर रहे थे तो मम्मी ने मुझसे निखिल के बारे में पूछा और कहने लगी

निखिल तुम्हें पसंद तो आया ना। मैंने मम्मी से कहा कि मम्मी मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा कि मुझे शादी करनी चाहिए या नहीं लेकिन यह तो सिर्फ मैं मम्मी से झूठ कह रही थी दरअसल मुझे निखिल दिल ही दिल बहुत भा गए थे और उसके बाद हम लोग जब पहली बार मिले तो मुझे निखिल से मिलकर बहुत अच्छा लगा।

पहली ही मुलाकात में मैंने निखिल से अपने बारे में सब कुछ कह दिया था मैं नहीं चाहती थी कि मैं उनसे कुछ भी छुपाऊं क्योंकि निखिल आखिरकार मेरे होने वाले पति जो थे मैंने निखिल से उस दिन करीब दो घंटे तक बात की।

कुछ ही समय बाद हमारी सगाई हो गई और सगाई के 6 महीने बाद हम लोगों की शादी तय हो गई शादी से मैं बहुत ज्यादा खुश थी। मेरी शादी अब निखिल से हो चुकी थी और हमारी सुहागरात के दिन मेरी ननद मुझे बहुत परेशान कर रही थी। निखिल की दो बहने हैं उन दोनों ने मुझे बहुत परेशान किया लेकिन जब मैं बेड पर बैठी हुई थी

तो निखिल मेरे पास कमरे में आए। जब वह कमरे में आए तो उन्होंने कमरे के दरवाजे की कुंडी को लगाया और मेरे पास आकर बैठ गए मेरी दिल की धड़कन तेज हो चुकी थी और मुझे बहुत ही ज्यादा घबराहट हो रही थी।

जब निखिल मेरे पास आकर बैठे तो वह मुझे कहने लगे कुसुम तुम घबराओ मत निखिल ने मेरे हाथ को पकड़ लिया। उन्होंने मुझे कहा तुम्हें घबराने की जरूरत नहीं है उन्होंने मुझे अपनी बाहों में ले लिया जब निखिल ने मुझे अपनी बाहों में लिया तो मुझे बड़ा अच्छा लगने लगा।

हम दोनों एक दूसरे की बाहों में थे निखिल ने मेरे होठों को चूमना शुरू किया और जिस प्रकार से निखिल मेरे होठों को चूम रहे थे उससे मेरे होठों पर लगी लिपस्टिक मिटने लगी थी। मेरे शरीर से गरमाहट बाहर आने लगी थी

मेरी घबराहट भी अब कम हो चुकी थी और मेरे दिल की धड़कन तेजी से धड़क रही थी वह कम होने लगी थी कुछ ही देर बाद जब निखिल ने मेरे स्तनों को दबाना शुरू किया तो मुझे भी अच्छा लगने लगा।

जब निखिल ने मेरे बदन से कपडे उतारते हुए मेरे अंतर्वस्त्रों को भी उतार दिया तो वह मुझे कहने लगे कुसुम तुम बड़ी लाजवाब हो। यह कहते ही उन्होंने मेरे स्तनों को अपने मुंह में ले लिया वह मेरे स्तनों को अपने मुंह में लेकर बड़े

अच्छे तरीके से चूस रहे थे उन्हें बड़ा अच्छा भी लग रहा था। वह मेरे स्तनों को चूस रहे थे जैसे वह मेरे स्तनों को खा ही जाएंगे उन्होंने मेरे स्तनों का रसपान बहुत ही देर तक किया।

जब उन्होंने मेरी योनि के अंदर अपने लंड को घुसाने की कोशिश की तो उनका लंड मेरी योनि में नहीं घुस रहा था उन्होंने मेरी योनि को चाटना शुरू किया मेरी योनि से गिला पदार्थ बाहर की तरफ निकलने लगा।

मेरी योनि की गरमाहट बढ़ने लगी थी मैं पूरी तरीके से उत्तेजित हो गई मैंने अपने दोनों पैरों को खोला और निखिल ने भी अपने लंड पर तेल की मालिश की यह मेरी पहली ही रात थी और निखिल ने जब मेरी योनि पर अपने लंड को लगाया तो उनका लंड तन कर खड़ा हो चुका था। जैसे ही निखिल ने मेरी योनि के अंदर अपने लंड को घुसाया तो मैं चिल्लाने लगी और उसी के साथ मेरी योनि के अंदर निखिल का लंड घुस चुका था।

निखिल का लंड मेरी योनि के अंदर प्रवेश हो चुका था और मेरे मुंह से बड़ी तेज चीख निकली उसी चीख के साथ मेरी योनि से खून निकलने लगा। मेरी चूत से ज्यादा खून निकल रहा था मैं उसे बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी।

निखिल मुझे बड़ी तेज गति से चोद रहे थे निखिल ने मुझे इतनी तेज धक्के दिए कि मेरा शरीर हिलने लगा और मेरी योनि से गर्मी बाहर निकलने लगी थी। कुछ क्षणो बाद जब निखिल ने अपने वीर्य से मेरी योनि को नेहला दिया तो मुझे अच्छा लगने लगा।

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