जिंदगी एक चूत है और किस्मत लौड़ा

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मेरा नाम राजेश है और मैं रेवाड़ी का रहने वाला हूं। मेरी उम्र 40 वर्ष है।

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मेरा डब्बा पैकिंग का काम है और मैं रेवाड़ी में डब्बो की सप्लाई करता हूं।

मेरा काम बहुत अच्छा चल रहा है। यह काम मैंने अपने भैया के साथ मिलकर शुरू किया था। उन्होंने बहुत ज्यादा मेहनत की और उसके बाद उन्होंने मुझे इस काम के बारे में जानकारी दी।

तब मैंने यह काम शुरू किया। मुझे इस काम को करते हुए 15 वर्ष हो चुके हैं। मेरे घर में मेरी पत्नी और दो लड़कियां हैं। मैं बहुत ही खुशमिजाज किस्म का व्यक्ति हूं और मेरे मोहल्ले में सब मुझसे बहुत खुश रहते है।

मैं किसी के साथ भी कभी झगड़ा नहीं करता हूं और ना ही किसी से मेरी कोई दुश्मनी है। मुझे सिर्फ अपने काम से ही मतलब रहता है। जिसकी वजह से सब लोग मुझे बहुत ही पसंद करते हैं और पूरे मोहल्ले में मेरी इज्जत है।

एक बार हमारे शहर में मेला लगा हुआ था। मैं सोच रहा था कि वहां जाऊं लेकिन मुझे समय नहीं मिल पा रहा था।

इसलिए मैं वहां नहीं जा पाया। मैंने अपनी पत्नी और बच्चों को मेले में भेज दिया था। वह लोग मेले में घूम कर आ गए थे। वह लोग बोल रहे थे इस वर्ष बहुत ही अच्छा मेला लगा है और काफी भीड़ भी काफी है।

एक दिन मैं दुकान में बैठा हुआ था। तभी मेरा एक बहुत पुराना दोस्त आया और वह कहने लगा, तुम्हारा काम कैसा चल रहा है। मैंने उसे कहा काम तो बहुत ही अच्छा चल रहा है। हम लोग ऐसे ही बैठे हुए बात कर रहे थे।

तभी उसने मुझे एक छल्ला दिखाया। वह बहुत ही अच्छा लग रहा था।

मैंने उससे पूछा कि तुमने यह कहां से लिया है। वह कहने लगा की मेला लगा हुआ है वहां मैं कल अपने बच्चों के साथ गया था। तो वहीं से मैं यह छल्ला ले आया।

मैंने उसे बोला यह चाबी का छल्ला तो बहुत ही अच्छा लग रहा है। वह कहने लगा कि तुम भी चलो तुम्हें भी मैं दिलवा दूंगा। वैसे भी आज मेरे पास कुछ काम है नहीं। मैंने उसे कहा चलो ठीक है। मुझे तुम आधा घंटा दो।

आधे घंटे में मैं अपना हिसाब किताब करके तुम्हारे साथ चल पड़ता हूं और फिर मैं अपने दोस्त के साथ ही मेले में चल पड़ा। जब मैं मेले में गया तो वहां बहुत ही भव्य मेला लगा हुआ था और काफी भीड़ थी।

हम लोग दोपहर के वक्त गए थे। उसके बावजूद भी बहुत भीड़ थी। मैंने अपने दोस्त से पूछा क्या यहां पर इतनी ही भीड़ है।

या इससे ज्यादा होगी। वह कहने लगा कि शाम को तो यहां पर बहुत ज्यादा भीड़ होती है। पैर रखने तक की जगह नहीं मिल पा रही है। मैं उससे कहने लगा तुम कल किस समय आए थे।

वह कहने लगा कि मैं कल रात को यहां पर आया था। मैंने भी उसे बताया कि मेरी पत्नी और मेरे बच्चे भी यहां मेले में घूमने आए थे। वह भी मेले की बहुत ही तारीफ कर रहे थे। अब हम लोग वहां पर घूमने लगे।

मेरा दोस्त मुझे उस छल्ले की दुकान पर ले गया और मैंने वहां पर छल्ला पसंद किया। वह छल्ले बहुत ही अच्छे लग रहे थे। मैंने दो तीन छल्ले वहां से ले लिये।

अब हम जैसे ही वापस जा रहे थे तो वहां पर एक लॉटरी की दुकान भी लगी हुई थी। मैंने देखा तो सोचने लगा चलो इस बार एक लॉटरी की टिकट खरीदी लेता हूं।

मैंने वहां से एक लॉटरी की टिकट खरीद ली। मैंने उस दुकान वाले से पूछा कि इसकी फाइनल की टिकट कब निकलेगी और इसमें क्या इनाम है। वह कहने लगे कि जिस को प्रथम पुरस्कार मिलेगा उसको एक कार मिलेगी। मैं यह सुनकर बहुत खुश हो गया और मैं अपने घर चला गया।

जिस दिन उस लॉटरी का फाइनल था। उस दिन मैं वहां पर पहुंच गया और मेरा दोस्त भी मेरे साथ में ही था। उस दिन किस्मत से मेरी लॉटरी निकल पड़ी और मुझे प्रथम पुरस्कार मिल गया। प्रथम पुरस्कार दो लोगों को मिलना था। तो उन्होंने 2 गाड़ियां रखी हुई थी। मैं बहुत खुश हुआ और अपने दोस्त के गले लग पड़ा।

क्योंकि मुझे बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि मैं यह पुरस्कार जीत जाऊंगा। उन्होंने अनाउंसमेंट करके मुझे बुलाया तो मैं वहां पर चला गया। मैं जैसे ही वहां पहुंचा तो एक महिला भी वही मेरे पास में खड़ी थी।

उनका भी लॉटरी में टिकट निकला था और उन्हें भी प्रथम पुरस्कार मिला था। मैंने उनसे पूछा क्या आपको भी यह कार मिली है।

वह कहने लगे कि हां, मेरा भी प्रथम पुरस्कार निकला है और मुझे यह कार मिली है। मैंने उनसे हाथ मिलाया और वह भी बहुत खुश थी। मैंने उनसे उनका नाम पूछा तो उन्होंने अपना नाम मुझे रेखा बताया।

उनकी उम्र भी 40 बरस की थी और वह भी एक शादीशुदा महिला थी। मैंने उनसे पूछा कि आप कहां रहते हैं। वह कहने लगी कि मैं रेवाड़ी में ही रहती हूं। तब मुझे पता चला कि वह तो हमारे मोहल्ले में ही रहती हैं लेकिन मैंने उन्हें कभी देखा नहीं था।

मैंने उनसे पूछा, क्या आप यहां पर नए आए हैं। वह कहने लगी नहीं हम तो बहुत समय से यहां पर हैं लेकिन मेरे पति दिल्ली में नौकरी करते हैं। इसलिए मैं उनके साथ ही वहां पर रहती हूं। अभी कुछ समय पहले ही हम लोग यहां पर आए हैं। यह बात सुनकर मैं तो हैरान रह गया। क्योंकि मुझे मेरे मोहल्ले के सब लोग पहचानते थे।

मैं बहुत खुश था और वह भी बहुत ज्यादा खुश थी। मैंने अपना पुरस्कार वहां से लिया और वह कार लेकर मैं घर पर चला गया। जैसे ही मैं घर पहुंचा तो मेरी पत्नी को यह सुनकर बहुत खुश हुई की मुझे लॉटरी में कर मिली है और मेरे घरवाले भी बहुत ज्यादा खुश हुए। तो वह मुझसे पूछने लगे कि और किसी को भी कार मिली है।

मैंने उन्हें कहा कि हां, हमारे पड़ोस में एक महिला रहती हैं। उनका भी प्रथम पुरस्कार निकला है। वह भी बहुत खुश हैं। अब एक दिन मैं अपनी कार से अपनी दुकान में जा रहा था तो तभी मुझे वह महिला भी दिख गई।

मैंने उनसे पूछा, और आपकी कार कैसी चल रही है। वह कहने लगे की बहुत अच्छी चल रही है।

उन्होंने मुझे बताया कि हमारा घर यहां पर है। तो मैं उनसे काफी देर तक बातें करने लगा और मैं जब भी अपने घर से गुजरता हूं तो वह मुझे वहां अक्सर दिख जाती थी। उनका घर हमारी अगली गली में ही था।

एक दिन में अपनी कार से जा रहा था तो रेखा मुझे आगे खड़ी हुई दिखी और उन्होंने मुझे हाथ दिखाकर रोक लिया। उन्होंने मुझे कहा कि आप का डब्बा पैकिंग का काम है मेरे घर में कुछ फंक्शन है तो मुझे मिठाइयों की पैकिंग करनी है तो क्या आप मुझे डब्बे दे सकते हैं। मैंने उन्हें कहा ठीक है आप मेरे साथ बैठ जाइए और आप मेरे कारखाने चलिए। मैं उन्हें अपने साथ बैठा कर कारखाने ले गया।

जब वह मेरे साथ आ रही थी तो मैं उनके स्तनों को देखता जा रहा था मैने देखा उनकी चूतडे बहुत बड़ी-बड़ी थी। जैसे ही मैं अपने कारखाने पहुंचा तो उन्हें अपने गोडाउन में ले गया।

वहां पर बहुत ज्यादा अंधेरा था और वहा कुछ दिखता भी नहीं है जब तक लाइट ना जलाई जाए। मैंने तुरंत ही लाइट खोली तो ऊपर से एक चूहा आकर उनके पैरों पर गिर गया। वह तुरंत ही मुझसे आकर लिपट गई और जैसे ही वह मुझसे लिपटी तो उनके स्तन मुझसे टकराने लगे।

मैं उन्हें अब अपने हाथों से दबा था और वह भी उत्तेजित हो जाती। मैंने ऐसे ही उन्हें वहां जमीन पर लेटा दिया मैं उनके स्तन और उनके होठो को बहुत देर तक चूसता जाता। मैंने उनके कपड़े भी खोल दिए और उन्हें नंगा कर दिया।

मैंने उनके नंगे बदन को देखा तो उनके अंदर अभी भी भरपूर जवानी थी। मैंने उनकी गांड को देखा तो मुझसे रहा नहीं गया मैंने उनकी गांड को चाटना शुरू कर दिया और थोड़ी देर उनकी योनि को चाटता रहा।

मैंने उन्हें जमीन पर उल्टा लेटाते ही उनकी गांड के अंदर अपने लंड को डाल दिया जैसे ही मैंने अपने लंड को उनकी गांड के अंदर डाला तो वह बड़ी तेजी से चिल्ला उठी।

वह कहने लगी आपने तो मेरी गांड के घोडे खोल दिए है मैंने उन्हें छोड़ा नहीं और ऐसे ही धक्के मारता रहा। मैं बड़ी तेज गति से उनकी गांड मार रहा था

जिससे कि उनकी चूतडो से बहुत तेज गर्मी निकल रही थी और उनके चूतड़ों से पसीना भी निकल गया था। मैंने अब उन्हें खड़ा करते हुए  उनकी गांड मारना शुरू किया और ऐसे ही उनकी गांड के अंदर अपने लंड को डालते जाता।

वह बड़ी तेज चिल्लाए जा रही थी। मेरा पूरा लंड छिल चुका था लेकिन मैंने उन्हें छोड़ने का नाम नहीं लिया और उनकी चूतड़ों पर इतनी तेज प्रहार करता कि उनके गले से चीख निकल जाती।

वह भी मेरे लंड पर अपने चूतडो को टकराऐ जा रही थी। उनकी गांड से भी कुछ चिपचिपा निकलने लगा। जिससे कि थोड़ी देर बाद मेरा वीर्य उनकी गांड के अंदर ही गिर गया। मुझे बहुत ही मजा आया उनकी गांड मारने मे।

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