शराफत का नकाब ओढ़े मोहल्ले की माल आइटम

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मेरा नाम सुशील है मैं जयपुर में  चाय के ठेले लगाता हूं, मैं जिस कॉलोनी में काम करता हूं

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उसी कॉलोनी में मुझे काम करते हुए काफी वर्ष हो चुके हैं। मैं राजस्थान के एक छोटे से गांव का रहने वाला हूं लेकिन मैं जयपुर में काफी समय पहले आ गया था इसलिए मैंने अपनी दुकान जयपुर में खोलने की सोची।

मैंने जयपुर में बहुत सारी जगह काम किया लेकिन अब मैं अपना ही काम करता हूं।

शाम को मेरे पास कॉलोनी के सारे बुजुर्ग लोग बैठने आते हैं, मेरी दुकान पर काफी भीड़ रहती है। मेरा एक छोटा सा ठेला है और उसी के अंदर मैंने छोटी सी जगह बैठने के लिए बनाई हुई है, कुछ लोग तो बाहर ही बैठ जाते हैं।

मैं यह काम अकेला ही करता हूं, काफी वर्षों से मैं यह काम कर रहा हूं। शाम को जब भी मेरे पास कॉलोनी के लोग आते हैं तो कॉलोनी के बारे में मुझे सब कुछ पता चल जाता है।

कॉलोनी में एक प्रभात जी हैं वह बहुत ज्यादा ही मजाकिया व्यक्ति हैं और उन्हें कॉलोनी की हर एक बात बता रहती है, वह जब भी शाम को आते हैं तो सब लोग उनके पास बैठ जाते हैं

और वह सब लोगों का बड़े अच्छे से टाइम पास कराते हैं। प्रभात जी के पास कॉलोनी की सारी खबरें होती है और वह हमेशा ही नई नई खबरें सबको सुनाते हैं। उनकी वजह से मेरी दुकान का काम भी अच्छा चलता है

क्योंकि उनके आने से मेरी दुकान में एक अलग ही रौनक रहती है इसीलिए मैं उनसे कभी भी चाय के पैसे नहीं लेता।

वह हमेशा ही मुझे कहते हैं कि तुम मुझसे चाय के पैसे क्यों नहीं लेते हो, मैं उन्हें कहता हूं प्रभात जी आपके आने से तो मेरी दुकान की रौनक बनी हुई है यदि आप नहीं आएंगे तो मेरी दुकान का काम भी अच्छा नहीं चल पायेगा इसलिए मैं आपसे कभी भी पैसे नहीं लेता।

प्रभात जी के पास सारी कॉलोनी की सारी खबरें रहती हैं इसीलिए कुछ लोग उन्हें खबरी के नाम से भी पुकारते हैं। वैसे प्रभात जी स्कूल में क्लर्क हैं लेकिन उसके बावजूद भी उन्हें कॉलोनी की सारी जानकारियां होती हैं।

एक दिन वह दुकान में बैठे हुए थे और हमारी कॉलोनी की एक महिला के बारे में चर्चाएं चल रही थी, उस दिन वह चर्चा बहुत ज्यादा हो गई क्योंकि जिन व्यक्ति के साथ उस महिला का चक्कर चल रहा था वह भी दुकान में आकर बैठ गए और उन्होंने दिन प्रभात जी को बहुत ही बुरा भला कह दिया,

जिससे कि वह थोड़ा गुस्सा हो गए और कई दिनों तक मेरी दुकान में भी नहीं आए। उनके ना आने से मेरी दुकान का काम थोड़ा ठंडा पड़ गया और मुझे लगा कि यदि वह दुकान पर नहीं आए तो मेरी दुकान का काम कम हो जाएगा

क्योंकि शाम को आधे से ज्यादा कस्टमर तो उनकी वजह से ही मेरे पास आते थे इसीलिए मैंने उन्हें फोन कर दिया और कहा कि प्रभात जी आजकल आप दुकान पर नहीं आ रहे हैं, वह कहने लगे की अब मेरा मन नहीं होता मैं अब आपकी दुकान में नहीं आ सकता।

मैंने उनसे आग्रह किया तो वह भी मेरी बात को मना नहीं कर पाये और कहने लगे ठीक है मैं कल से तुम्हारी दुकान में आ जाया करूंगा। अगले दिन ही वह मेरी दुकान में आ गए, उनके आते ही मेरी दुकान में भीड़ हो गई।

अगले दिन भी उनके पास एक चटपटी खबर थी और उन्होंने वह भी सबको बता दी, उन्होंने कहा कि जो पारुल है उसका हमारी कॉलोनी के एक लड़के के साथ चक्कर चल रहा है, यह बात किसी को भी नहीं पता थी क्योंकि पारुल के पिताजी डॉक्टर हैं और वह एक बहुत ही जाने-माने डॉक्टर हैं।

इस बात पर तो मुझे भी यकीन नहीं हुआ और मैं भी प्रभात जी के पास आकर बैठ गया। मैंने उन्हें कहा कि क्या आप यह सही बात कह रहे हैं कि पारुल का किसी लड़के के साथ चक्कर चल रहा है, वह कहने लगे यहां हमारे कॉलोनी के ही गुलाटी जी के लड़के के साथ उसका रिलेशन है और उन्ही के साथ उसका चक्कर चल रहा है।

मैंने उन्हें कहा कि मैंने तो उसे किसी और लड़की के साथ भी कई बार आते जाते देखा है, यह खबर उनके लिए भी कुछ नई सी थी इसलिए वह भी बड़े चटखारे लेकर सुन रहे थे और वह मुझे कहने लगे तुम भी लगता है

अब मेरी तरह ही खबरी बन चुके हो। मैंने प्रभात जी को कहा कि नहीं मैंने उसे वाकई में किसी लड़के के साथ कई बार आते जाते देखा है।

जब यह बात मैंने प्रभात जी को बताई तो वह कहने लगे लगता है मुझे देखना पड़ेगा कि पारुल का किसके साथ चल रहा है क्योंकि मुझे जहां तक जानकारी है उसका गुलाटी जी के लड़के के साथ ही चक्कर चल रहा है।

मैं भी यह बात सुनकर हैरान रह गया क्योंकि पारुल को सब लोग बहुत ही अच्छा मानते हैं और उसके पिताजी की हमारी पूरी कॉलोनी में बड़ी इज्जत है इसी वजह से मैं भी इस बात को बिल्कुल हजम नहीं कर पा रहा था

लेकिन मैंने अपनी आंखों से देखा था इसीलिए मैंने प्रभात जी को यह बात बता दी कि मैंने उसे वाकई में किसी लड़के के साथ देखा है। यह बात उनके लिए भी नई थी इसलिए वह अगले दिन एक नई खबर ले आए और कहने लगे हां तुम बिलकुल सही कह रहे थे उसका किसी और लड़के के साथ भी चक्कर चल रहा है।

मैंने उन्हें कहा कि मुझे तो बिल्कुल ही यकीन नहीं हो रहा कि पारुल भी ऐसा कर सकती है, मैं तो उसे एक अच्छी लड़की मानता था। जब मैंने प्रभात जी से बात की तो वह कहने लगे मैं तुम्हें पारुल की गरमा गरम तस्वीर दिखाता हूं।

उन्होंने मुझे पारुल और गुलाटी जी के लड़के की गरमा गरम तस्वीर दिखाइ। मैंने उनसे कहा कि आप यह मुझे दे दीजिए उन्होंने मुझे वह तस्वीरें दे दी। अगले दिन पारुल उस लड़के के साथ आ रही थी तो मैंने उसे आवाज देते हुए रोक लिया, मैने उसे कहा और पारुल जी आप कैसे हो।

वह कहने लगी मैं तो अच्छी हूं लेकिन आज आपने मुझे आवाज देकर कैसे रोक लिया कुछ काम था क्या। मैंने पारुल को तस्वीर दिखाई तो वह देखते ही हैरान रह गई।

वह कहने लगी यह तस्वीरें तुम्हारे पास कहां से आई वह बहुत डर गई थी।

मुझे यह बात पूरी तरीके से पता चल गई कि वह एक ठरकी लड़की है और सिर्फ अपनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए वह लड़कों को अपने जाल में फंसाती है।

उसने मुझे कहा आज तुम मेरे पास आ जाना मैं तुम्हें खुश कर दूंगी। मैंने उसे कहा मुझे तुम अभी खुश कर दो मैं अभी तुम्हारे साथ चलता हूं।

मैं उसे एक होटल में ले गया हूं पारुल ने अपने कपड़े खोले तो मैं उसके बदन को देख कर बहुत ज्यादा उत्तेजित हो गया। मैंने पारुल के स्तनों को दबाना शुरू कर दिया वह

इतनी ज्यादा ठरकी थी कि उसने तुरंत ही मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर सकिंग करना शुरू कर दिया और बड़े अच्छे से वह मेरे लंड को चुसती रही जब मेरा पानी निकल गया तो उसने मुझे कहा तुम मुझे घोड़ी बनाकर चोदना क्योंकि घोड़ी बनाकर चुदने का एक अलग ही मजा है।

मैंने कुछ देर उसके स्तनों का रसपान किया उसके बाद मैंने भी उसकी चूत मे अपने लंड को डाल दिया जैसे ही मेरा कडक लंड उसकी योनि के अंदर गया तो वह चिल्ला उठी और बड़ी मादक आवाज में सिसकिंया ले रही थी।

मैं उसे बहुत तेजी से चोदता काफी देर तक मै उसे चोदता रहा लेकिन जब हम दोनों एक दूसरे की गर्मी को नहीं झेल पाए तो मेरा वीर्य 5 मिनट के अंदर ही उसकी योनि के अंदर गिर चुका था।

वह कहने लगी तुम मेरे बैग में से सरसों का तेल निकाल लो और उसे अपने लंड पर लगा लो। मैंने उसकी बैग में से तेल निकालते ही अपने लंड पर लगा लिया मेरा लंड पूरा कड़क हो चुका था।

मैंने जैसे ही पारुल की गांड के अंदर अपने कडक लंड को डाला तो वह चिल्लाने लगी, उसकी गांड से खून निकलने लगा मेरा लंड 9 इंच का मोटा है जब वह पारुल की गांड के छोटे से छेद में जाता तो वह चिल्ला उठती।

मैं भी उसे बड़ी तेज तेज धक्के मार रहा था मुझे बहुत अच्छा लग रहा था जब मैं पारुल की गांड मार रहा था। मैंने उसकी 38 साइज की गांड को पकड़ा हुआ था

मैने उसे बड़ी तेज गति से धक्के मारे लेकिन मैं 2 मिनट के अंदर ही झड़ गया और 2 मिनट मुझे बहुत ज्यादा सुकून मिला। वह हमेशा ही मेरे पास आ जाए करती और कहती आज मेरी गांड की खुजली को मिटा दो।

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