वह लंबी चुदाई की यादें

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मैं और मेरी सहेली कॉलेज के लिए साथ में जा रहे थे हम दोनों बस का इंतजार कर रहे थे।

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हम लोग बस स्टॉप पर ही काफी देर तक बस का इंतजार करते रहे लेकिन बस नहीं आ रही और जैसे ही बस आई तो हम लोग बस में बैठे।

बस में काफी ज्यादा भीड़ थी मैंने जैसे-तैसे अपने पर्स से पैसे निकालते हुए कंडक्टर को दिए और उसके बाद हम दोनों ही साथ में खड़े थे। हम लोगों के कॉलेज के बाहर जब हम लोग उतरे तो उस दिन सब लोग हमारे कॉलेज में होने वाले प्रोग्राम की बात कर रहे थे।

हमारे कॉलेज में एनुअल फंक्शन होने वाला था और उसकी ही चर्चाएं बड़ी जोरों पर थी मेरी सहेली ने भी मुझे  कहा अब तो कॉलेज में बड़ा मजा आएगा हमारे कॉलेज में एनुअल फंक्शन होने वाला है।

मैंने उसे कहा तुम बहुत ही ज्यादा खुश हो रही हो वह कहने लगी कि तुमने पिछले साल का एनुअल फंक्शन नहीं देखा कितना अच्छा हुआ था और हमारे कॉलेज के लगभग सभी बच्चे एनुअल फंक्शन में आए हुए थे।

हम लोग इसी दिन का इंतजार कर रहे थे कि कब हमारे कॉलेज में एनुअल फंक्शन होगा और करीब एक महीने बाद एनुअल फंक्शन की तैयारियां हो चुकी थी। कुछ और कॉलेजो से भी बच्चे आने वाले थे और जब दूसरे कॉलेज के बच्चे हमारे कॉलेज में आए हुए थे तो उसी दौरान मेरी मुलाकात दीपक से हुई।

जब मैं दीपक से मिली तो दीपक भी हमारे कॉलेज के एनुअल फंक्शन में अपने प्रोग्राम के लिए आया हुआ था दीपक ने हमारे कॉलेज में अपना डांस दिखाया था।

मुझे उसका डांस बहुत अच्छा लगा और मेरे दिल की धड़कने बहुत तेज हो गई थी दीपक से पहली बार मुलाकात होना मेरे लिए बहुत अच्छा था और उसके बाद भी हम लोग एक दूसरे से अक्सर मिलते रहे।

दीपक को मैं पसंद करने लगी थी मुझे नहीं मालूम था कि दीपक और मेरे बीच इतनी ज्यादा नजदीकियां बढ़ जाएगी कि हम दोनों एक दूसरे को प्यार करने लगेंगे लेकिन मेरे परिवार वाले शायद हमारे प्यार को कभी भी स्वीकार नहीं करते इसलिए मैंने कभी भी अपने पापा और मम्मी को इस बारे में पता नहीं चलने दिया।

मैं और दीपक चोरी छुपे एक दूसरे से मिलते जब भी मुझे किसी चीज की जरूरत होती तो मैं दीपक से कहती तो दीपक मेरी हमेशा ही मदद किया करता। सब कुछ बड़े ही अच्छे से चल रहा था मैं और दीपक एक दूसरे के साथ बहुत खुश थे और हम दोनों के रिलेशन को करीब दो वर्ष बीकने वाले थे।

इन दो वर्षों में हम दोनों ने एक दूसरे के साथ अच्छा समय बिताया लेकिन अब दीपक अपनी जॉब के सिलसिले में मुंबई जाने वाला था। दीपक की जॉब मुंबई लग चुकी थी और अब वह थोड़े ही समय बाद कानपुर से मुंबई जाने वाला था मैं जब दीपक से मिली तो मैंने दीपक को कहा की तुम यही कोई जॉब नहीं कर सकते।

दीपक ने मुझे कहा कि महिमा तुम्हें तो मालूम ही है ना कि कानपुर में मेरे लिए कोई नौकरी कर पाना शायद मुश्किल होगा और मैं हमेशा से ही सोचा करता था कि मैं मुंबई में जाकर नौकरी करूं। मैंने दीपक से कहा लेकिन मुझे तुम्हारी बहुत याद आएगी मैं चाहती थी कि तुम यही कोई नौकरी कर लो लेकिन दीपक के भी अपने सपने थे

और उन्हें वह पूरा करना चाहता था शायद इसी वजह से वह मुंबई चला गया था। दीपक मुंबई चला गया और मैं कानपुर में ही थी मुझे दीपक की बहुत याद आती तो मैं हमेशा ही उससे फोन पर बात किया करती।

दीपक और मैं फोन पर बात करते तो कई बार मेरी मां ने मुझे फोन पर बातें करते हुए देख लिया था लेकिन मेरी मां को अभी तक इस बारे में कुछ पता नहीं था कि मैं किसी से प्यार करती हूं मैं उसके साथ अपना जीवन बताना चाहती हूं। मेरी मां मुझे हमेशा कहती कि इसके बाद तुम्हारी पढ़ाई पूरी हो जाएगी और उसके बाद हम लोग

तुम्हारी शादी करवा देंगे लेकिन मैं अभी शादी नहीं करना चाहती थी मेरे दिल में तो सिर्फ दीपक था और मैं दीपक से शादी करना चाहती थी। हम दोनों एक दूसरे से फोन पर घंटों बात किया करते लेकिन अब धीरे-धीरे दीपक मुझसे फोन पर कम बातें करने लगा था और मुझे भी यह लगने लगा कि दीपक मुंबई जाकर बदल चुका है।

एक दिन मैंने दीपक से कहा कि मुझे लगता है कि तुम मुंबई जाकर पूरी तरीके से बदल चुके हो तो वह मुझे कहने लगा कि तुम ऐसा क्यों कह रही हो।

मैंने उसे कहा कि दीपक मैं देख रही हूं कि कुछ दिनों से तुम मुझसे बात नहीं कर रहे हो मुझे नहीं लगता कि शायद तुम मुझसे प्यार भी करते हो। दीपक मुझे कहने लगा कि महिमा ऐसा बिल्कुल भी नहीं है

मैं तुमसे ही प्यार करता हूं और मैं तुम्हारे साथ ही जीवन बिताना चाहता हूं।

मैंने दीपक को कहा यदि तुम्हारा किसी और लड़की के साथ कोई अफेयर चल रहा है तो तुम मुझे इस बारे में बता दो। दीपक कहने लगा कि महिमा क्या तुम्हारा दिमाग सही है तुमने ऐसा सोच भी कैसे लिया और फिर दीपक ने फोन रख दिया। उसके बाद मैंने दीपक को दोबारा से फोन किया दीपक ने फोन उठाया तो दीपक मुझे कहने लगा कि महिमा मैं तुमसे ही प्यार करता हूं और तुम्हारे साथ ही मैं शादी करना चाहता हूं

लेकिन तुम्हें तो मालूम है कि हम दोनों की शादी होना इतना आसान नहीं है

उसके लिए मुझे पहले अपने पैरों पर खड़ा होना पड़ेगा और मुझे कुछ करके दिखाना पड़ेगा उसके बाद ही तो मैं तुम्हारे घर में हमारे रिश्ते की बात कर सकता हूँ।

दीपक अपनी पूरी मेहनत से काम कर रहा था और उसके बाद मैंने कभी भी दीपक से इस बारे में कुछ बात नहीं की और ना ही दीपक ने मुझसे कभी इस बारे में कुछ कहा हम दोनों ही एक दूसरे से फोन पर बात करते।

करीब 8 महीने बाद जब दीपक से मेरी मुलाकात हुई तो मैं बहुत खुश हुई मुझे पता ही नहीं चला कि कब 8 महीने बीत गए और इतने लंबे अंतराल बाद जब हम दोनों मिले तो मैं बहुत ही ज्यादा खुश थी और दीपक भी बहुत खुश था। दीपक मुझे कहने लगा कि महिमा तुमसे मिलकर मुझे बहुत खुशी हो रही है,

मैं चाहती थी कि दीपक मेरे घर में बात कर ले। दीपक और मैं एक दिन साथ में बैठे हुए थे उस दिन हम दोनों आपस में बात कर रहे थे तो मैंने दीपक से कहा कि क्या तुम मेरे पापा मम्मी से बात नहीं कर सकते। दीपक ने कहा ठीक है मैं तुम्हारे पापा और मम्मी से बात करता हूं उसके लिए मैं तुम्हारे घर भी आ जाऊंगा।

उस दिन मैं दीपक के साथ बैठी हुई थी तो मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। हम दोनों साथ में बैठे हुए थे लेकिन उस वक्त जब पहली बार हम दोनों के बीच किस हुआ तो मेरे लिए यह एक अलग ही फिलीग थी। पहली बार मैंने दीपक के साथ किस किया हम दोनो किस कर कर रहे थे तो मुझे बहुत ही अच्छा लगा था।

मैंने किसी के साथ उससे पहले कभी भी किस नहीं किया था हालांकि हम दोनों के रिश्ते को इतना समय हो चुका था लेकिन उस दिन मुझे भी लगा मुझे दीपक के साथ शारीरिक संबंध बनाने चाहिए।

मैं दीपक के साथ सेक्स के लिए तड़प रही थी यह दीपक भी जानता था। मैं दीपक के साथ सेक्स करने के लिए तैयार हो चुकी थी दीपक ने मुझे अपने घर पर बुला लिया उसके परिवार वाले अपने किसी रिश्तेदार के घर गए हुए थे इसलिए हम लोगों के लिए बहुत ही अच्छा मौका था। पहली बार हम दोनों के बीच में सेक्स हुआ था मैंने जब दीपक से कहा दीपक आज हम दोनों अकेले हैं मुझे बहुत अच्छा लग रहा है।

दीपक ने मुझे अपनी बाहों में भर लिया और मैं जब उसकी गोद में बैठी हुई थी तो उसका लंड मेरी चूतडो से टकरा रहा था वह एकदम तन कर खड़ा हो चुका था। उसने जैसे ही अपने लंड को बाहर निकाला तो

मैंने उसके लंड को देखा। मैंने कहा तुम्हारा लंड कितना मोटा है वह मुझे कहने लगा मैं चाहता हूं तुम मेरे मोटे लंड को अपने मुंह के अंदर ले लो।

मैंने दीपक के मोटे लंड को अपने मुंह के अंदर समा लिया जब दीपक का लंड मेरे मुंह के अंदर बाहर हुआ तो मैंने उससे कहा मुझे लगता है कि मैं तुम्हारा लंड को ज्यादा देर तक नहीं ले पाऊंगी।

दीपक ने अपने मोटे लंड को मेरे मुंह के अंदर तक डाल दिया था मैं अब इतनी ज्यादा गर्म होने लगी थी कि दीपक ने मेरे बदन से कपड़े उतारते हुए मेरी चूत के अंदर लंड डालना शुरू कर दिया जिससे कि निकलता हुआ पानी बढने लगा था।

मैं अपने आपको रोक नहीं पा रहा था मैंने दीपक से कहा तुम अपने लंड को मेरी चूत में डाल दो। दीपक ने धीरे-धीरे अपने मोटे लंड को मेरी चूत के अंदर प्रवेश करवाना शुरू कर दिया और दीपक का मोटा लंड मेरी चूत के अंदर बाहर होने लगा था वह मुझे कहने लगा मुझे लगता है तुम्हारी चूत से खून बहार की तरफ आने लगा है।

दीपक ने मेरे अंदर की गर्मी को पूरी तरीके से बढा कर रख दिया था। मुझे मजा आ रहा था और दीपक मुझे धक्के मार रहा था लेकिन वह मेरी टाइट चूत की गर्मी ज्यादा समय तक झेल ना सका और थोड़े ही समय बाद उसने अपने वीर्य को मेरी चूत में ही गिरा दिया।

मैं इस बात से बहुत ज्यादा खुश हो गई थी कि पहली बार दीपक के साथ में शारीरिक सुख का आनंद ले पाई।

कुछ देर तक हम दोनों साथ में बैठे रहे लेकिन ना जाने दीपक का मन दोबारा से मुझे चोदने का होने लगा और दीपक ने दोबारा से मेरे बदन की गर्मी को बढा कर रख दिया।

मैंने दीपक के लंड को बहुत ज्यादा हिलाया दीपक ने मुझे कहा मैं तुम्हारी चूत मे लंड को डालना चाहता हूं।

दीपक ने मुझे अपनी गोद में उठा लिया और मेरी चूत के अंदर अपने लंड घुसा दिया उसका लंड मेरी चूत के अंदर जा चुका था वह मुझे बड़ी ही तेजी से धक्के मार रहा था।

दीपक ने मुझे अपनी गोद में उठाया हुआ था मुझे लगा वह मेरी चूत को फाड़ कर ही मानेगा और उसने ऐसा ही किया दीपक ने मेरी चूत से दोबारा से खून निकाल दिया था। जब मेरी चूत से कुछ ज्यादा ही पानी बाहर निकलने लगा

तो थोड़े समय बाद उसका वीर्य भी मेरी चूत में प्रवेश हो चुका था और मुझे बहुत ही मजा आया। दीपक के साथ मै आज भी रिलेशन में हूं लेकिन अभी तक हमारी शादी की बात आगे नहीं बढ़ पाई है।

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