गोद मे बैठते ही लंड टकराया

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मां कहने लगी बेटा जरा दरवाजा खोल कर देखना कौन तबसे बेल बजाए जा रहा है मैंने मां से कहा मां बस अभी देख कर आती हूं। मैं जब दरवाजा खोलकर बाहर देखने लगी तो मुझे कोई भी नहीं दिखाई दिया मैंने मां से कहा कोई भी तो नहीं है मां कहने लगी मुझे लगा शायद कोई रहा होगा लेकिन अब चला गया।

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दोबारा से कोई डोर बेल बजाने लगा मैंने जब बाहर जाकर देखा तो बाहर कोई भी नहीं था मैंने मां से कहा मां शायद कोई ऐसे ही परेशान कर रहा होगा। मां कहने लगी बच्चे ही होंगे मैंने मां से कहा छोड़ो अब रहने दो और उसके बाद भी कई बार कोई बेल बजाता रहा लेकिन हम लोगों ने दरवाजा नहीं खोला।

जब काफी देर से कोई बेल बजा रहा था तो मैंने बाहर जाकर देखा तो बाहर पापा थे मैंने पापा से कहा पापा आप कब से आए। वह कहने लगे कि मैं तो कब से बाहर खड़ा था और बार-बार बेल बजाए जा रहा हूं लेकिन तुम लोग दरवाजा ही नहीं खोल रहे हो।

मैंने पापा से कहा पापा मैं दरवाजा इसलिए नहीं खोल रही थी कि मुझे लगा शायद कोई बाहर फालतू में बेल बजा रहा है। मां कहने लगी बच्चे बड़े शरारती हो गए हैं और वह लोग किसी की भी डोरबेल बजा कर भाग जाते हैं पापा कहने लगे चलो कोई बात नहीं। पापा अंदर आये और सोफे पर बैठ गये मैंने पापा को पानी ला कर दिया पापा ने पानी पिया और कहने लगे आज गर्मी बहुत ज्यादा हो रही है। मैंने पापा से कहा क्या ए सी ऑन कर दूं तो पापा कहने लगे नहीं बेटा रहने दो मैंने पापा से कहा यदि ए सी ऑन करना है तो कर देती हूं लेकिन पापा कहने लगे रहने दो

थोड़ी देर बाद ऑन करना। मैंने थोड़ी देर के बाद ए सी ऑन कर दिया पापा बैठे हुए थे और वह मम्मी से कहने लगे तुम्हें मालूम है आज रास्ते में क्या हुआ मम्मी कहने लगी हां बताओ ना क्या हुआ।

पापा ने कहा कि कुछ लड़कियां शराब के नशे में धुत थी और वह लोगों से बत्तमीजी कर रहे थे तो मम्मी कहने लगी आजकल का माहौल भी पूरा  बदल चुका है अब भला लड़कियों को शराब पीने की क्या जरूरत पड़ गई।

पापा कहने लगे की अब इसमें हम भी क्या कह सकते हैं यह तो अब जमाना बदल रहा है और पूरी तरीके से जमाना बदल चुका है। पापा मम्मी अपने पुराने दौर की बातें करने लगे तो मैं भी उनकी बातें मजे लेकर सुन रही थी उसके बाद मैं अपने कमरे में चली गई। जब मैं अपने कमरे में गई तो मैंने देखा मेरे फोन पर दो-तीन मिस कॉल आई हुई थी

मैंने नंबर देखा तो मुझे नंबर कुछ समझ नहीं आया कि नंबर है किसका क्योंकि मेरे फोन में वह नंबर सेव नहीं था। मैंने जब उस नंबर पर कॉल किया तो सामने से आवाज आई हेलो कौन बोल रहा है? मैंने कहा कि आपका कॉल मेरे नंबर पर आया था। वह कहने लगे मैडम सॉरी शायद गलती से लग गया

उन व्यक्ति के बात करने का तरीका बड़ा ही सभ्यता था मैंने भी फोन रख दिया लेकिन उनकी आवाज में जो जादू था वह मेरे दिल को छूने लगा और मैं उनकी आवाज से प्यार कर बैठी। मैंने अपने दरवाजे को बंद कर लिया और मैंने जब कॉल किया तो उन्होंने फोन उठाया और मुझसे बात करने लगे मैंने उनसे पूछा सर आपका नाम क्या है

वह कहने लगे मेरा नाम संजीव है। मैंने उन्हें कहा आप क्या करते हैं तो वह कहने लगे कि मैं बैंक में जॉब करता हूं मैंने संजीव जी से कहा लेकिन सर आपकी आवाज बड़ी ही अच्छी है आपकी आवाज सुनकर बहुत अच्छा लगा।

वह कहने लगे आप क्या करती हैं मैंने उन्हें बताया कि अभी कुछ समय पहले ही मैंने अपनी पढ़ाई कॉलेज से पूरी की है। वह कहने लगे आपने कौन से सब्जेक्ट से अपनी पढ़ाई पूरी की है मैंने उन्हें बताया कि मैंने एम.ऐ  हिंदी से अपनी पढ़ाई पूरी की है। मैंने मां के पैरों की आवाज सुन ली थी वह मेरी तरफ ही आ रही थी

इसलिए मैं घबरा गयी और मैंने फोन काट दिया मां जब मेरे पास आई तो कहने लगी शालिनी बेटा मैं कब से आवाज लगा रही थी तुम सुन ही नहीं रही हो। मैंने मां से कहा मां बस ऐसे ही आंख लग गई थी

मां कहने लगी अच्छा तो तुम्हारी आंख इतनी ज्यादा लग गई थी कि तुमने मेरी आवाज ही

नहीं सुनी मैंने मां से कहा मां मैं सो गई थी। मां कहने लगी चलो अब खाना खा लो कब से तुम्हे आवाज लगा रहे है हम लोग खाने की टेबल पर बैठे हुए थे।

मेरे दिल में सिर्फ संजीव जी की आवाज गूंज रही थी और मैंने उनसे मिलने का फैसला कर लिया था मैं उनसे मिलना चाहती थी। मैंने जब उनसे मिलने का फैसला किया तो हम दोनों ही थोड़ा नर्वस थे मैं पहली बार ही किसी से मिलने जा रही थी मुझे यह डर था कि कहीं वह मुझे देखते हुए कुछ गलत ना समझ ले।

मेरा रंग सांवला है और मुझे ऐसा लग रहा था कि कहीं उनके दिल में मेरे लिए कोई गलत धारणा ना पैदा हो जाए इसलिए मुझसे जितना हो सकता था उतना मेकअप कर के मैं गई हुई थी। जब मैं संजीव जी से मिली तो वह बिल्कुल ही सिंपल और साधारण थे उनके व्यक्तित्व में एक अलग ही आकर्षण था जो कि मुझे अपनी ओर खींच रहा था।

उनकी हंसी और उनके व्यक्तित्व में मैं पूरी तरीके से फिदा हो गई थी मैंने जब संजीव जी से बात की तो मुझे बहुत अच्छा लगा। पहली बार मैं किसी से इतना खुलकर बात कर रही थी और उनसे बात करना मुझे बड़ा अच्छा लगा वह भी मुझे कहने लगे कि आप बहुत अच्छी लग रही हैं लेकिन मुझे अंदर से ऐसा लग रहा था

कि जैसे मैं उनके सामने अपना दिखावटी चेहरा दिखा रही हूँ जो कि मैं थी ही नहीं। मैं बिल्कुल सिंपल और साधारण हूं मैं सूट और सलवार पहनने वाली लड़की उस दिन वेस्टर्न ड्रेस में संजीव जी से मिलने के लिए गई।

मेरी उनसे पहली मुलाकात बड़ी ही अच्छी रही और हम दोनों के बीच काफी बातें हुई मुझे भी उनके बारे में बहुत कुछ जानने को मिला और मुझे इस बात की खुशी थी कि कम से कम मैं किसी से बात तो कर पाई।

मुझे बहुत ही अच्छा लगा और संजीव जी के साथ समय का पता ही नहीं चला कि कब इतने घंटे बीत गए लेकिन उनसे बात करने का एक अलग ही आनंद है।

हम लोग फोन पर घंटों बात किया करते थे मैं उनसे मिलने के लिए उनके बैंक में भी चले जाया करती थी हम दोनों को एक दूसरे का साथ अच्छा लगता था।

अभी हम दोनों ने अपने प्यार का इजहार नहीं किया था और ना ही संजीव जी ने कभी मुझसे

इस बारे में कोई बात की थी मुझे लगता था कि शायद मुझे ही संजीव जी को कह देना चाहिए लेकिन मैं उनसे अपने दिल की बात बिल्कुल भी ना कह सकी और हम दोनों का रिश्ता ऐसे ही चलता रहा।

हम अच्छे दोस्त थे लेकिन यह दोस्ती सिर्फ दोस्ती तक ही सीमित रह गई और इससे आगे फिलहाल तो बढ़ती हुई नजर नहीं आ रही थी। मैंने  अभी तक संजीव से कुछ भी नहीं कहा था और ना ही संजीव की तरफ से कोई पहल हुई थी लेकिन हम दोनों एक दूसरे को बहुत चाहते थे।

एक दिन हम दोनों ने मूवी देखने का फैसला किया और उस दिन जब हम मूवी देखने के लिए गए तो हम दोनों एक दूसरे के साथ बैठे हुए थे हम दोनों को मूवी देखना बहुत अच्छा लगता था। यही हम दोनों को जोडती थी

क्योंकि हम दोनों के बीच काफी चीजों में समानताएं थी और मुझे भी बड़ा अच्छा लगता कम से कम संजीव जी भी मेरी तरह ही सोचते हैं। जिस प्रकार से मैने संजीव जी के साथ अपनी दोस्ती को आगे बढ़ाया

उससे हम दोनों अच्छे दोस्त है और आगे बढ़ चुके थे। उस दिन पहली बार मूवी के दौरान मेरे और संजीव जी के बीच में किस हो गया और पहला ही चुंबन था।

इस चुंबन ने हम दोनों को अपना बना लिया हम दोनों अब एक दूसरे से खुलकर बातें करने लगी थी। फोन पर भी कभी कभार हम लोगों की अश्लील बातें हो जाती संजीव जी भी चाहते थे कि हम दोनों एक दूसरे के साथ कहीं अकेले में समय बिताया करते। मैंने संजीव जी के साथ अकेले में समय बिताने के बारे में सोच लिया था

जब मैं संजीव जी के साथ उनके घर पर गई तो वह मुझे कहने लगी बैठो ना शालिनी मैं बैठ गई और जिस प्रकार से मैं बैठी हुई थी वह मुझे देख रहे थे। वह मेरे पास आकर बैठे जब संजीव जी

मेरे पास आकर बैठे तो मैंने उन्हें कहा आप शायद शर्मा रहे है। वह कहने लगे नहीं ऐसी तो कोई भी बात नहीं है संजीव जी ने मेरे होठों को किस कर लिया और मेरी जांघ को दबाने लगे। वह मेरी जांघ को दबा रहे थे मुझे बहुत अच्छा लग रहा था

उन्होंने मेरी जांघ को बहुत देर तक सहलाया और जब उन्होंने अपने लंड को मेरे मुंह में डाला तो मैंने उसे चूसना शुरू किया। मुझे बड़ा अच्छा लगा मैंने उनके लंड को चूसकर लाल कर दिया था मैं काफी देर तक उनके लंड के मजे लेती रही।

मुझे बहुत अच्छा लग रहा था जिस प्रकार से मिलने उनके लंड के मजे लिए और जब मैंने संजीव जी से कहा मुझसे रहा नहीं जा रहा उन्होंने भी मेरी योनि के अंदर अपनी उंगली डाल दी।

मेरी योनि में दर्द होने लगा लेकिन जब उन्होंने अपने लंड को मेरी योनि में घुसाया तो मैं बेहाल हो चुकी थी। मेरे मुंह से चीख निकली लेकिन उनके साथ मुझे बड़ा अच्छा भी लगा और मुझे बड़ी तेज गति से धक्के मारने लगे थे।

उनके धक्को में और भी तेजी आने लगी थी क्योंकि मेरी टाइट चूत से खून बाहर निकलने लगा था और मुझे आनंद आ रहा था। यह पहले ही मौका था जब मैंने किसी के साथ सेक्स संबंध बनाए थे

लेकिन सेक्स संबंध बनाने में बड़ा आनंद आ रहा था उन्होंने मुझे चोदकर पूरी तरीके से संतुष्ट कर दिया था। उनके साथ सेक्स करना अच्छा रहा और मेरी चूत की खुजली भी मिट चुकी थी।

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