मकान मालकिन लंड लेने की आदी निकली

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मेरा नाम राजीव है मैं पंजाब का रहने वाला हूं। मेरी उम्र 25 वर्ष है। मेरे घर की स्थिति पहले से ही ठीक नहीं थी इसलिए मेरी मां ने मुझे मेरे चाचा के पास भेज दिया। मेरे चाचा ने हीं बचपन से मेरा पालन-पोषण किया है

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और उन्होंने मुझे कभी कोई कमी नहीं होने दी। उन्होंने मुझे अपने बच्चे की तरह प्यार किया और हमेशा ही वह मुझे कहते हैं कि तुम कभी भी अपने आपको हमसे अलग मत समझना

इसलिए मैं भी उन पर पूरा हक जमाता हूं और हमेशा ही अपने चाचा से कहता हूं कि आपने मेरे लिए बहुत कुछ किया है। मुझे काफी समय हो चुका था

जब मैं अपने घर नहीं गया था। मैंने सोचा कि अपने मम्मी पापा से मिल आता हूं। मैं जब उनसे मिलने के लिए अपने घर पर गया तो मेरे पिताजी मुझे कहने लगे बेटा तुम कैसे हो? अब तो तुम्हारी पढ़ाई भी पूरी हो चुकी है। मैंने अपने पिताजी से कहा मैं अब नौकरी करने लगा हूं।

वह कहने लगे तुम्हारे चाचा ने हम पर बहुत एहसान किया यदि वह तुम्हें नहीं पढ़ाते तो हम पर कितना बोझ पड़ जाता। उन्होंने तुम्हें एक अच्छी शिक्षा दी और मेरे छोटे भाई ने अपने भाई होने का फर्ज पूरा किया।

मेरे पिताजी मेरे चाचा का बहुत एहसान मानते हैं। मैंने अपनी मम्मी से कहा कि अब आप लोग मेरे साथ ही रहने के लिए चलिए। आप लोग यहां अकेले रहकर क्या करेंगे? वह लोग कहने लगे कि नहीं बेटा अब हम तुम्हारे साथ आकर क्या करेंगे। हमें अब गांव में रहने की आदत हो चुकी है और हम लोग अब कहीं बाहर भी नहीं जा सकते हैं।

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हमें काफी अटपटा सा लगेगा। मैंने उन्हें कहा लेकिन मुझे तो आपकी जरूरत है। बचपन में भी मुझे आप लोगों का प्यार नहीं मिल पाया और अब तो मैं आप लोगों के साथ ही रहना चाहता हूं। मेरी मां कहने लगी ठीक है

बेटा इस बारे में हम लोग थोडे दिनों बाद तुम्हें सोच कर बताएंगे लेकिन अभी तो हम लोग तुम्हारे साथ नहीं चल सकते। मैं भी कुछ दिनों तक अपने घर पर रुका और जब मैं वापस लौट आया तो मैं अपने काम में बिजी हो गया।

मैं अब अपने काम में ही लगा हुआ था और मुझे जब भी वक्त मिलता तो मैं अपने मम्मी पापा को फोन कर लेता। मैं अब भी अपने चाचा के साथ ही रहता था।

एक दिन मेरी मां का मुझे फोन आया वह कहने लगी कि अब हम लोग तुम्हारे साथ रहना चाहते हैं। जब मैंने यह बात सुनी तो मैं बहुत खुश हो गया। मैंने जब यह बात चाचा को बताई तो चाचा कहने लगे कि चलो ठीक है

अब भैया और भाभी भी हमारे साथ आ जाएंगे तो अच्छा होगा लेकिन मैं अब चाचा पर और बोझ नहीं डालना चाहता था इसलिए मैंने चाचा से आग्रह किया कि मैं अपने लिए कहीं घर देख लेता हूं। वहीं पर मेरे साथ मम्मी पापा रह लेंगे।

चाचा कहने लगे तुम यह किस प्रकार की बात कर रहे हो। क्या वह मेरे भैया और भाभी नहीं है? मैंने कहा चाचा आपने हम पर बहुत एहसान किए हैं। अब मैं आपका और अहसान नहीं लेना चाहता।

वह कहने लगे इसमें एहसान की क्या बात है। तुम मेरे अपने हो और यदि मैंने तुम्हारी मदद कर दी तो इसमें कोई एहसान वाली बात नहीं है लेकिन मैंने उनसे जिद की और फिर मैंने अलग घर देखना शुरू कर दिया। मैंने अपने चाचा से भी कह दिया था उन्होंने मेरे लिए एक घर देख लिया जो कि मेरे ऑफिस से नजदीक था।

मैंने वहां पर सारा सामान जोड़ लिया था और जब मैंने सारा सामान जोड़ लिया तो मेरे मम्मी पापा भी मेरे पास आ गए। अब वह लोग मेरे साथ ही रहने लगे थे तो मुझे भी अच्छा लगने लगा था। मेरे मां-बाप बहुत ज्यादा खुश थे।

वह कहने लगे कि हमें भी तुम्हारे साथ रहना अच्छा लगने लगा है। इतने बरसों बाद हम लोग तुम्हारे साथ रह रहे हैं। मैंने अपनी मम्मी से कहा मैं तो कब से चाहता था लेकिन उस वक्त मैं कुछ कमाता भी नहीं था इसलिए मैंने आप लोगों को नहीं कहा लेकिन अब मैं अपने पैरों पर खड़ा हो चुका हूं तो मैं आप लोगों के साथ रह सकता हूं।

मेरे पिताजी यह बात सुनकर अपने आप को बहुत गौरवान्वित महसूस कर रहे थे और उन्हें काफी अच्छा भी लग रहा था। अब मैं उन दोनों की देखभाल करता तो मुझे भी अच्छा लगता। मैं जिस कॉलोनी में रहता हूं

वहां पर भी धीरे धीरे मेरी अब सब लोगों से बातचीत होने लगी थी और मेरी मम्मी भी शाम के वक्त टहलने के लिए चली जाती। मेरे लिए तो यह बहुत ही खुशी की बात थी।

बीच बीच में मेरे चाचा और चाची भी मुझसे मिलने के लिए आते रहते। एक दो बार मैं भी अपने मम्मी पापा को चाचा चाची के घर पर लेकर गया था तो उन लोगों ने वहां पर भी उनके साथ अच्छा वक्त बिताया।

मैं जिस घर पर रहता था वहां पर कोई भी नहीं रहता था क्योंकि यह मकान जिनका था वह लोग चंडीगढ़ में रहते थे परंतु एक दिन उनका फोन आया और वह कहने लगे कि हम लोग कुछ दिनों के लिए छुट्टी मनाने के लिए अपने घर आ रहे हैं। तुम साफ सफाई करवा देना। मैंने कहा ठीक है सर मैं साफ सफाई करवा दूंगा।

वह लोग ऊपर के फ्लोर में रहते थे और हम लोग नीचे के फ्लोर में रहते थे। मैंने एक दिन उनके घर की सारी साफ सफाई करवा दी। कुछ दिनों बाद वह लोग भी आ गए मेरी मुलाकात अपने मकान मालिक से पहले हो चुकी थी

क्योंकि जिस वक्त उन्होंने घर दिया था उस वक्त मेरी मुलाकात उनसे हो चुकी थी उनका नाम गौरव है

लेकिन उनकी पत्नी से मेरी पहली ही मुलाकात थी। उन्होंने जब मुझे अपनी पत्नी से मिलवाया तो वह अपनी नजरो से मुझे घूर रही थी। मैं अपनी नजरो को बार बार उनसे बचाता लेकिन मुझे नहीं पता था उनकी चूत में खुजली है।

एक दिन उन्होंने मौका देखते हुए मुझे अपने पास बुला लिया मुझे लगा शायद कोई काम होगा मैं जब उनके साथ बैठा तो वह मेरी गोद में आकर बैठ गई। वह मेरी गोद में आकर बैठी तो मेरा लंड बिल्कुल तन कर खड़ा होने लगा।

मेरा लंड उनकी मोटी गांड से टकराता तो मेरे अंदर और भी जोश पैदा हो जाता। मैंने उनके कपड़े खोलने शुरू कर दिए। जैसे ही मैने उनके बदन से सारे कपड़े उतारे तो उनका बदन देखकर मेरा लंड तन कर खड़ा हो गया।

उन्होंने भी झट से मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर सकिंग करना शुरू कर दिया जब वह सकिंग कर रही थी तो मेरा लंड पानी छोड़ने लगा और मेरी उत्तेजना भी बिल्कुल चरम सीमा पर पहुंच गई।

मैंने उनके बड़े स्तनों का रसपान काफी समय तक किया जैसे ही मैने उनकी चूत पर अपनी जीभ को लगाया तो वह पूरी तरीके से उत्तेजित हो जाती और मुझसे अपनी चूत मरवाने के लिए तैयार बैठे थी।

मैंने भी उनकी चूत के अंदर उंगली डालकर उनकी चूत पूरी गिली कर दी। मैंने अपने लंड को उनकी योनि पर सटाया तो वह कहने लगी आप जल्दी से अपने लंड को मेरी योनि में प्रवेश करवा दो।

मैंने भी तेजी के साथ उनकी योनि के अंदर अपने लंड को प्रवेश करवा दिया। जैसे ही मेरा मोटा लंड उनकी योनि के अंदर प्रवेश हुआ तो वह कहने लगी आपका लंड तो बहुत ही मोटा है ऐसे लंड मुझे अपनी चूत में लेने में बहुत मजा आता है आप मुझे ऐसे ही तेज धक्के देते रहो।

मैंने भी उन्हें बड़ी तेज गति से धक्के दिए वह बड़ी इज्जत से बात कर रही थी लेकिन उनकी चूत मारने में मुझे बड़ा मजा आता मेरा 9 इंच मोटा लंड और भी ज्यादा मोटा होता गया।

जब मैं अपने लंड को उनकी चिकनी चूत के अंदर बाहर करता तो उनके अंदर और भी ज्यादा जोश पैदा हो जाता।

मेरे लंड और उनकी योनि से जो घर्षण पैदा हो रहा था। मैंने नहीं सोचा था इतनी जल्दी मैं उन्हें चोद पाऊंगा यह तो मेरे लिए कोई सपना था लेकिन जैसे ही मेरा है वीर्य उनकी योनि के अंदर गिरा तो मुझे लगा मैंने कितने अच्छे।

से उनकी चूत मारी। वह जब तक घर पर रही तब तक वह कोई मौका नहीं छोड़ती और मुझे अपने पास बुला लेती मुझे भी जैसे उनकी आदत होने लगी थी।

उन्हें चोदकर मुझे बहुत अच्छा महसूस होता एक दिन तो उनकी चूत में इतने ज्यादा खुजली हो गई कि वह रात को 1:00 बजे मुझे फोन करने लगे और मुझे फोन करके अपने पास बुला लिया।

मैंने गुस्से में उस दिन उनकी चूत बड़ी तेजी से मारी और कहा क्या तुम्हें तुम्हारे पति तुम्हें नहीं चोदते। वह कहने लगी उनकी तो छोटी सी लुल्ली है और उनके साथ सेक्स करने में मजा भी नहीं आता।

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