पति को दूसरी महिला के हवाले किया

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हवा बहुत ही ज्यादा तेज चल रही थी और खिड़की आपस में टकरा रही थी मैंने राजेश को कहा आप खिड़की बंद कर दीजिए राजेश कहने लगे लगता है बाहर बहुत तेज बारिश होने वाली है।

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मैंने राजेश को कहा हां लगता तो ऐसा ही है कि बाहर बहुत तेज बारिश होने वाली है लेकिन आप खिड़की बंद कर दीजिए राजेश कहने लगे ठीक है मैं खिड़की बंद कर देता हूं।

राजेश ने खिड़की बंद कर दी थी और राजेश मुझे कहने लगे कि बाहर मौसम देखो कितना सुहावना हो रखा है लगता है कुछ देर बाद ही बारिश होने वाली है।

थोड़ी देर बाद बारिश शुरू हो गई जब बारिश शुरू हुई तो बारिश बहुत तेज होने लगी बारिश के होने से गर्मी से तो राहत मिल गई थी। राजेश मुझे कहने लगे की मेरे लिए कुछ बना दो मैंने राजेश को कहा

मैं अभी आपके लिए गरमा गरम पकौड़े बना देती हूं। बारिश के मौसम में यदि चाय के साथ गरमा-गरम पकोड़े मिल जाए तो उसका एक अलग ही आनंद होता है।

मैंने पकोड़े बनाए और राजेश और मैं साथ में पकोड़े का आनंद ले रहे थे राजेश मुझे कहने लगे कि मधु मैं काफी दिन से सोच रहा था कि तुमसे बात करूं। मैंने राजेश को कहा लेकिन आप किस बारे में मुझसे बात करना चाहते हैं तो राजेश मुझे कहने लगे कि मैं सोच रहा था कुछ दिनों के लिए गांव हो आता हूं।

मैंने राजेश को कहा लेकिन आप गांव जाकर क्या करेंगे वह मुझे कहने लगे कि काफी दिनों से माता पिता से मुलाकात नहीं हो पाई है तो सोच रहा हूं कि उनसे मिलने के लिए गांव चला जाऊं।

वह लोग अब भी गांव में ही रहते हैं और हमारे पास वह लोग बहुत कम ही आया करते हैं क्योंकि उन्हें शायद गांव में रहना ही अच्छा लगता है। मैंने राजेश को कहा राजेश तुम देख लो जैसा तुम्हें ठीक लगता है।

राजेश को अहमदाबाद में आए हुए 5 वर्ष हो चुके हैं राजेश ने अपनी मेहनत से यह सब कुछ हासिल किया है राजेश से मेरी मुलाकात दो वर्ष पहले एक मॉल में हुई थी। राजेश और मेरी मुलाकात बहुत

अच्छी रही उसके बाद हम दोनों ने एक दूसरे के साथ शादी करने का फैसला कर लिया राजेश पहले अपने माता पिता के साथ गांव में ही रहा करते थे।

राजेश और मैं आपस में बात कर रहे थे तो राजेश कहने लगे कि मैं कुछ दिनों में गांव चला जाता हूं मैंने राजेश को कहा आप देख लीजिए जैसा आपको उचित लगता है मैं भी मम्मी पापा के पास चली जाऊंगी।

कुछ दिनों बाद राजेश गांव चले गए और मैं भी मम्मी पापा के पास चली गई और जब मैं मम्मी पापा के पास गई तो मेरे चाचा जी आए हुए थे वह मुझसे कहने लगे बेटा घर में सब कुछ ठीक तो है ना। मैंने बताया हां चाचा जी घर में सब कुछ ठीक है वह मुझे कहने लगे राजेश तुम्हारे साथ नहीं आया तो मैंने चाचा जी से कहा राजेश गांव गए हुए हैं।

वह मुझे कहने लगे तो वह गांव से कब लौटेंगे मैंने उन्हें कहा अब उन्होंने मुझे यह तो नहीं बताया कि वह गांव से कब लौटेंगे लेकिन जल्दी ही वह गांव से लौट आएंगे। चाचा जी और मैं आपस में बात कर रहे थे चाचा जी से बात करना मुझे बिल्कुल भी पसंद नहीं है क्योंकि वह कभी भी हमारे परिवार की खुशियां देख ही नहीं सकते थे।

उन्ही की वजह से पापा का बिजनेस में बहुत बड़ा नुकसान हुआ था लेकिन उसके बावजूद भी पापा ने चाचा जी को कुछ नहीं कहा क्योंकि उन्हें लगता था कि यदि चाचा जी की वजह से यह नुकसान हुआ है तो वह उसकी भरपाई कर लेंगे लेकिन पापा भी कर्ज के बोझ तले दब गए और जैसे-तैसे वह अपना जीवन गुजार रहे हैं।

मां इस बात से बहुत परेशान है लेकिन चाचा जी को कहां इन सब बातों की परवाह है वह तो हमेशा से ही लालची रहे हैं और उन्हें पैसे की इतनी ज्यादा भूख है कि वह किसी भी हद तक जा सकते हैं।

चाचा जी अब घर से जा चुके थे लेकिन पापा की तबीयत भी कुछ दिनों से ठीक नहीं थी तो मैंने पापा से कहा यदि आप की तबीयत ठीक नहीं है तो आप डॉक्टर को क्यों नहीं दिखाते। वह मुझे कहने लगे कि हां मेरी तबीयत तो ठीक नहीं है और मैं सोच भी रहा था की डॉक्टर को मैं दिखा देता हूं।

मैंने मम्मी से कहा मम्मी आपने पापा को डॉक्टर को क्यों नहीं दिखाया तो मम्मी कहने लगी बेटा मैं तो इन्हें कब से कह रही थी लेकिन यह सुनते ही कहा है। मैंने पापा से कहा पापा मैं अभी आपको डॉक्टर के पास ले चलती हूं और मेरी जिद के आगे पापा शायद कुछ कह ना सके और मैं उन्हें डॉक्टर के पास ले गई।

जब मैं उनको डॉक्टर के पास ले गई तो डॉक्टर ने उनसे उनकी बीमारी के बारे में पूछा डॉक्टर ने उन्हें कुछ टेस्ट लिख कर दे दिए उसके बाद मैंने उनके टेस्ट करवाए तो पता चला कि उनकी तबीयत खराब है।

डॉक्टर से अब उनका इलाज लंबा चलने वाला था मैंने फोन पर यह बात राजेश को बता दी तो राजेश कहने लगे तुम उनका इलाज किसी अच्छे अस्पताल में करवाओ। मैंने राजेश को कहा ठीक है मैं उनका इलाज किसी अच्छे अस्पताल में करवाती हूं क्योंकि राजेश ने उनके इलाज का खर्चा उठाने के लिए हामी भर दी थी

इसलिए अब उनका इलाज एक अस्पताल में चल रहा था। राजेश अभी भी गांव में ही थे और वह अभी तक गांव से वापस नहीं लौटे थे मैंने राजेश को कहा तुम गांव से वापस कब लौटेंगे तो वह कहने लगे बस जल्दी ही

मैं गांव से वापस लौट आऊंगा। राजेश गांव से वापस अहमदाबाद आ चुके थे मैंने राजेश को सारी बात बताई और कहा कि पापा काफी दिनों से बीमार थे लेकिन उन्होंने किसी को भी यह बात नहीं बताई थी।

मैंने जब यह बात राजेश को कहीं तो राजेश कहने लगे पापा बहुत ही ज्यादा परेशान हैं और शायद इसीलिए वह किसी को भी अपनी बीमारी के बारे में नहीं बताना चाहते थे। राजेश की मदद से उनकी तबीयत अब ठीक होने लगी थी और उनका इलाज भी एक अच्छे अस्पताल में चल रहा था अब वह पहले से बेहतर महसूस कर रहे थे।

पापा मुझे कहने लगे कि बेटा राजेश और तुम्हारे बीच का यह प्यार देखकर मुझे बहुत खुशी है मैंने पापा से कहा पापा आप जानते नहीं थे कि राजेश एक अच्छा लड़का है मैं राजेश के साथ बहुत खुश हूं।

पापा भी अब ठीक हो चुके थे और मम्मी और मैं एक दिन शॉपिंग के लिए मॉल में गए तो उस दिन मेरी मुलाकात मेरी सहेली रचना से हुई रचना से काफी वर्षों बाद मैं मिल रही थी।

रचना मुझसे पूछने लगी तुम्हारे पति कहां है तो मैंने उसे बताया कि वह अपने काम पर हैं रचना को मैंने उसके शादीशुदा जीवन के बारे में पूछा तो वह मुझे कहने लगी कि सब कुछ ठीक चल रहा है लेकिन उसके चेहरे पर वह खुशी नहीं थी जो कि उसके चेहरे पर होनी चाहिए थी। रचना से मैंने उसका नंबर ले लिया था

और एक दिन रचना ने मुझे और राजेश को अपने घर पर इनवाइट किया। जब उसने हमें अपने घर पर इनवाइट किया तो उसके पति रजत से मेरी और राजेश की मुलाकात हुई उनका व्यवहार और बात करने का तरीका कुछ ठीक नहीं था। मैंने राजेश को कहा कि रचना के पति रजत का व्यवहार बिल्कुल भी ठीक नहीं है।

रचना मुझसे कई बार अपने पति के बारे में कहती रहती थी। मुझे यह बात नहीं मालूम थी कि रचना राजेश को ही अपने जाल में फंसा लेगी। एक दिन मैंने उन दोनों को रंगे हाथ पकड़ लिया वह

दोनों अपनी गर्दन नीचे करके मेरी आंखों से नजर नहीं मिला पा रहे थे। मैंने उन्हें कहा तुम दोनों ने ऐसा क्यों किया तो रचना ने मुझे अपनी सारी बात बताई और कहने लगी रजत कुछ भी नहीं कर पाता है

इसलिए तो मैंने राजेश के साथ शारीरिक संबंध बनाने का फैसला किया था, तुम्हें सब कुछ पता चल चुका है तो इसलिए तुमसे छुपा कर भी कोई फायदा नहीं है तुम ही देख लो मुझे ऐसे मे क्या करना चाहिए।

मैंने भी रचना से कहा मुझे मालूम है कि तुम बहुत ही ज्यादा परेशान हो मैं समझ सकती हूं जिस प्रकार से तुम तड़पती हो। मैं समझ सकती हूं लेकिन तुमने राजेश के साथ अब शारीरिक संबंध बना ही लिए हैं तो मुझे उससे कोई आपत्ति नहीं है। मैंने रचना को कहा तुम अपने कपड़े खोल लो राजेश ने अपने लंड को निकाल लिया।

राजेश ने जब अपने लंड को बाहर निकाला तो मैंने उनके मोटे लंड को अपने मुंह में ले लिया हालांकि राजेश मेरा पति है लेकिन उस दिन सेक्स करने में कुछ ज्यादा ही मजा आ रहा था। थोड़ी देर बाद रचना ने भी उनके मोटे लंड को अपने मुंह के अंदर समा लिया वह बड़े ही अच्छे से उनके लंड को चूस रही थी

उसको बहुत अच्छा लग रहा था। काफी देर तक रचना ऐसा ही करती रही जब राजेश ने रचना को घोड़ी बनाया और वह रचना को घोड़ी बनाकर चोदने लगे। मुझे बहुत अच्छा लग रहा था राजेश अपनी ताकत का प्रदर्शन कर रहा था

और मुझे इस बात की खुशी थी कि राजेश रचना की चूत मार रहे है राजेश को रचना को चोदने में बहुत मजा आ रहा था मैं यह सब देख रही थी।

जब रचना ने मेरी योनि को चाटना शुरू किया तो मुझे भी अच्छा लगा और मैं उत्तेजित गई थी मेरे अंदर जोश पैदा होने लगा। राजेश ने मेरे दोनों पैरों को खोलते हुए मेरी योनि के बीच में अपने लंड को लगाया मुझे बहुत अच्छा लग रहा था मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था जिस प्रकार से राजेश मुझे धक्के मार रहा था

उससे मैं बहुत ही ज्यादा खुश हो गई थी। मैं इस बात से इतनी उत्तेजित हो गई कि मैंने रचना की योनि को चाटने शुरू किया राजेश मुझे अब भी धक्के मार रहे थे।

राजेश ने मुझे काफी देर तक ऐसे ही धक्के दिए जब राजेश का वीर्य गिरने वाला था तो राजेश ने हम दोनों को ही कहा कि मेरा वीर्य गिरने वाला है।

हम दोनों ने ही राजेश के वीर्य को अपने मुंह के अंदर ले लिया और मुझे बहुत अच्छा लगा

उसके बाद रचना और राजेश के कई बार शारीरिक संबंध बनते रहते थे लेकिन मुझे इस बात से कोई भी आपत्ति नहीं थी और ना ही रचना को कोई दिक्कत है।

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