पति के जाने पे की हवस पूरी – 2 

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मैं अपना काम करने लगी।  फिर शाम को वो नीचे ही शिफ्ट हो गया। मैंने उसको रूम दिखा दिया और उसको खाना बनाकर दिया। अब रात को मैं देर तक टीवी देखती रही और फिर सो गई।  

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इस तरह से तीन दिन निकल गए।  अगले दिन जब मैं बाथरूम से कपड़े धोकर निकल रही थी तो मेरा पैर फिसल गया और मैं गिर गई। मेरी कमर में दर्द हो गया और मैं मुश्किल से उठकर रूम तक गई।  मैंने रमेश को बुलाया और उसको बताया कि मैं गिर गई हूं। 

वो दवा लेकर आया, मैंने दर्द की दवाई ली और सो गई।  जब मैं उठी तो दर्द वैसा ही था। फिर वो बाम लेकर आया और बोला कि ये बाम लगा लो।  मैं बाम लगाने लगी मगर मेरा हाथ पीछे नहीं जा रहा था।  मैंने फिर से रमेश को ही बुलाया।

पति के जाने पे की हवस पूरी – 3

वो बाम लगाने के लिए तैयार हो गया।  मैं पेट के बल लेट गई और वो बाम लगाने लगा।  अपना शर्ट मैंने ऊपर कर दिया था और नीच से ब्रा भी नहीं पहनी थी। मेरी पीठ नंगी थी।  

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वो बाम लगाते हुए अपने हाथ मेरी चूचियों तक लाने लगा जिससे मुझे मजा आने लगा।  जब मुझसे रुका नहीं गया तो मैंने उसको मना कर दिया। फिर वो हट गया।  मैं बोली- मैं खाना नहीं बना सकती रमेश!  वो बोला- कोई बात नहीं भाभी, मैं सारा काम कर दूंगा। आप परेशान मत हो। फिर वो खाना बनाने चला गया। 

मैंने हस्बैंड को फोन किया और सारी बात बताई।  फिर ऐसे ही हम लोग रोमांटिक बातें करने लगे और फिर हस्बैंड मुझे वीडियो कॉल पर लंड दिखाने लगे।  मैं गर्म हो गई और फिर कॉल खत्म हो जाने के बाद अपनी पजामी को नीचे करके अपनी चूत में उंगली से सहलाने लगी।  मेरी चूत में गीलापन हो गया था।  

तभी मैंने दरवाजे की तरफ देखा तो गेट थोड़ा सा खुला हुआ था। मुझे लगा कि शायद रमेश सब कुछ देखकर गया है।  कुछ देर बाद वो खाना लेकर आ गया और हमने खाना खाया। 

मैंने उसको वहीं मेरे रूम में सोने के लिए ही बोल दिया।  वो सोने लगा और मैं भी सो गई।  रात को मुझे मेरे पेट पर किसी का हाथ फिरता हुआ महसूस हुआ।  मैंने देखा तो रमेश मेरे पेट पर हाथ फिरा रहा था।

मैं लेटी रही और कुछ नहीं बोली।  वो धीरे धीरे अपने हाथों से मेरे बूब्स भी दबाने लगा। मुझे अच्छा लगने लगा और मजा आने लगा।  पर फिर मैंने एकदम से आंखें खोल दीं और उसको बोली- ये क्या कर रहे थे तुम?  ये सुनकर वो डर गया और माफी मांगने लगा। वो बोला- भाभी मैं कंट्रोल नहीं कर पाया। 

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आप भैया को कुछ मत बताना। मैं बोली- नहीं बताऊंगी लेकिन तुम्हें मेरी बॉडी की अच्छे से मालिश करनी होगी।  वो बोला- हां, मैं कर दूंगा। फिर वो मालिश करने लगा और मेरी चूचियों तक हाथ लाने लगा।  मुझे बहुत मजा आने लगा और मैं हल्की हल्की आहें भरने लगी। 

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उसने पूछा तो मैं बोली- देख रमेश, तू जो करना चाहता है कर ले लेकिन ये बात किसी को नहीं बताना!  उसने कहा- नहीं बताऊंगा भाभी। फिर उसने मेरी कुर्ती को निकलवा दिया और मेरे बूब्स को नंगा कर दिया।  वो मेरे बूब्स दबाने लगा और फिर हम दोनों एक दूसरे के होंठों पर किस करने लगे।  

कुछ देर होंठों को चूसने के बाद वो मेरे बूब्स को पीने लगा और पीते पीते उसने मेरी पजामी को खोलकर नीचे कर दिया। अब मेरी चूत भी नंगी हो गई थी। वो मेरी चूत को सहलाने लगा, चूत में उंगली करने लगा और उसको चूमने चाटने लगा।   फिर उसने मेरी चूत में जीभ देकर चूसना शुरू कर दिया। मैं बहुत चुदासी हो गई। 

अब मेरी चूत में लंड की प्यास लग गई थी।  वो तेजी से मेरी चूत में जीभ को चला रहा था और मैं आह्ह … आह्ह … करके उसके मुंह में चूत को धकेल रही थी।  अब उसने अपनी ट्राउजर और टीशर्ट खोलकर साइड में कर दिया और मेरी चूत को फिर से चूसने लगा। मेरे मुंह से आह्ह … आह्ह … की सिसकारियां निकल रही थीं।  

उसने मेरे दोनों पैरों को फैलाकर अपने लंड का सुपारा मेरी चूत के बीच रख दिया। उसके बाद उसने मेरे दोनों मम्मों को मसलते हुए अपने लंड के सुपारे को मेरी चूत पर रगड़ना शुरू कर दिया।  

मेरे सारे बदन में गुदगुदी सी होने लगी और जोश में आकर मैं सिसकारियां भरने लगी। अब दर्द के मारे मेरे मुँह से एकदम से चीख निकल गई क्योंकि उसने एकदम से लंड का सुपारा मेरी चूत में घुसा दिया था। 

 मुझे लग रहा था कि किसी ने गर्म लोहे का भाला मेरी चूत में घुसेड़ दिया हो। मगर मैंने रमेश को बिल्कुल भी मना नहीं किया क्योंकि मैं पूरे जोश में आ चुकी थी 

रमेश का पूरा लंड अपनी चूत के अन्दर लेना चाहती थी।  तभी उसने एक जोर का धक्का और लगा दिया। दर्द के मारे मेरे मुँह से जोर की चीख निकली और मेरी आँखों में आंसू आ गए।  

मुझे लग रहा था कि जैसे कोई गर्म लोहा मेरी चूत को चीरते हुए अन्दर घुस गया हो।  मैंने दर्द से तड़पते हुए कहा- बाहर निकाल लो अपना लंड, बहुत दर्द हो रहा है। 

उसने कहा- थोड़ा बर्दाश्त करो भाभी, फिर खूब मजा आएगा। उसका लंड मेरी चूत में 3 इंच तक घुस चुका था। 

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